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सतीश नांदल ने हरियाणा से भरा पर्चा, कांग्रेस को सुभाष चंद्रा क्यों याद आए?

हरियाणा में दो सीटों के लिए राज्यसभा के चुनाव होने हैं लेकिन अब तीसरे उम्मीदवार की भी एंट्री हो गई है। इस एंट्री से कांग्रेस को सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा की जीत याद आने लगी है।

subhash chandra satish nandal and kartikey sharma

सुभाष चंद्रा, सतीश नांदल और कार्तिकेय शर्मा, Photo Credit: Social Media

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हरियाणा में राज्यसभा का चुनाव अब रोमांचक हो गया है। कुल दो सीटें खाली हुई हैं और विधायकों की संख्या के हिसाब से देखें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने एक-एक उम्मीदवार उतारे हैं। बीजेपी ने संजय भाटिया तो कांग्रेस ने करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। पहले माना जा रहा था कि दो ही उम्मीदवार होंगे तो वोटिंग की नौबत नहीं आएगी। अब बीजेपी के ही नेता सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरकर इस चुनाव को रोमांचक बना दिया है। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार करमबीर बौद्ध के नामांकन के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दावा किया है कि सभी कांग्रेसी विधायक करमबीर के लिए वोट डालेंगे और वह विजयी होंगे।

 

बीजेपी ने संजय भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाया है। संजय भाटिया वही नेता हैं जो 2019 से 2024 तक करनाल लोकसभा सीट से सांसद थे। 2024 में जब मनोहर लाल खट्टर को लोकसभा का टिकट दिया गया तो उन्हें करनाल से ही उतारा गया जिसके चलते संजय भाटिया को अपनी सीट छोड़नी पड़ी थी। अब संजय भाटिया की एंट्री राज्यसभा से हो रही है और उनकी जीत भी निश्चित मानी जा रही है।

 

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हरियाणा में क्या है समीकरण?

 

हरियाणा में कुल विधायकों की संख्या 90 है। मौजूदा वक्त में बीजेपी के पास 48, कांग्रेस के पास 37 और 3 निर्दलीय विधायक हैं। इंडियन नेशनल लोकदल के पास कुल 2 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का वोट चाहिए। इस हिसाब से बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपनी एक-एक सीटें जीत सकते हैं। रोचक बात है कि तीन निर्दलीय विधायक भी बीजेपी के साथ हैं यानी उसकी संख्या कुल 51 तक है। इसका मतलब हुआ कि 31 विधायकों के वोट डालने के बाद बीजेपी के पाले में 20 विधायक अतिरिक्त बचेंगे। इस गणित के बावजूद कांग्रेस की जीत आसान लग रही है लेकिन पिछले दो झटके कांग्रेस को जरूर याद होंगे।

 

2016 और 2022 में भी ऐसी ही स्थिति थी लेकिन कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। 2014 में कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट खारिज हो गए थे और सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए थे। 2022 में कांग्रेस के पास 31 विधायक थे लेकिन अजय माकन चुनाव हार गए थे और बीजेपी के कृष्ण लाल पंवार और कार्तिकेय शर्मा को जीत मिल गई थी। ऐसे में इस बार भी कांग्रेस को बेहद सावधानी बरतनी होगी और अपने विधायकों को एकजुट रखना होगा। 

 

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कांग्रेस की कलह का फायदा उठाएगी BJP

 

चर्चा है कि कई गुटों में बंटी हरियाणा कांग्रेस के कई नेता अपने-अपने लिए राज्यसभा सीट मांग रहे थे। अब करमबीर बौद्ध की एंट्री से ज्यादातर लोग संतु्ष्ट नहीं हैं। ऐसे में एक बार फिर से हरियाणा में निर्दलीय उम्मीदवार इस कलह का फायदा उठा सकते हैं। इससे पहले ऐसी ही स्थिति दो बार बन चुकी है और तब एक बार डॉ. सुभाष चंद्रा और एक बार कार्तिकेय शर्मा ने कांग्रेस को पटखनी देकर हरियाणा में जीत हासिल कर ली थी।

कौन हैं सतीश नांदल?

 

हरियाणा के रोहतक जिले से आने वाले सतीश नांदल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के धुर विरोधी माने जाते हैं। 2009 और 2014 में वह गढ़ी-सांपला-किलोई विधानसभा सीट प भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ इंडियन नेशनल लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े थे। 2019 के चुनाव से पहले वह बीजेपी में शामिल हो गए और एक बार फिर हुड्डा के ही खिलाफ चुनाव लड़े। हालांकि, उन्हें कभी भी हुड्डा के खिलाफ जीत नहीं मिली लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है कि वह बदला लेने के मूड में हैं।

 

कहा जा रहा है कि INLD में पुराने संपर्क के चलते सतीश नांदल इस पार्टी के दो विधायकों, कुछ निर्दलीयों और कांग्रेस में हुड्डा कैंप के विरोधियों को अपने पाले में ला सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए एक बड़ी हार साबित हो सकती है।

 


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