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दूसरे देश से नहीं, राज्यों की सीमाओं पर ही लड़ते हुए क्यों मर गए असम के 202 लोग?

असम और पड़ोसी राज्यों से सीमा विवाद दशकों पुराना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1989 से अब तक सीमा झड़पों में असम के 202 लोगों की मौत हुई है।

Why Assam border clashes with Meghalaya Nagaland Mizoram and Arunachal Pradesh

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, Photo Credit: PTI

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असम और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच सीमा विवाद लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1989 से अब तक अंतरराज्यीय सीमा पर हुई झड़पों में असम के 202 लोगों की मौत हो चुकी है। असम की सीमा नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम से लगती है। ये सभी राज्य 1960 और 1970 के दशक में असम से अलग होकर बने थे।

 

असम सरकार के बॉर्डर सिक्योरिटी एंड डेवलपमेंट विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि सीमा का सही तरीके से तय न होना ही विवाद की बड़ी वजह है। जमीन और सीमा को लेकर दोनों राज्यों के लोगों के बीच कई बार तनाव बढ़ जाता है और बात हिंसक झड़प तक पहुंच जाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विवादित इलाकों में विकास और रोजगार के मौके बढ़ाकर तनाव को कम किया जा सकता है।

 

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गोलाघाट में सबसे ज्यादा मौतें

असम पुलिस के बॉर्डर ऑर्गनाइजेशन के आंकड़े के मुताबिक, 1989 से अब तक मेघालय, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमाओं पर हुई झड़पों में 202 लोगों की जान गई है। इनमें सबसे ज्यादा 142 मौतें गोलाघाट जिले में दर्ज की गईं। इसके बाद कछार में 34 और बिस्वनाथ में 15 लोगों की मौत हुई। वेस्ट कार्बी आंगलोंग, कार्बी आंगलोंग, जोरहाट, धेमाजी और कामरूप भी सीमा विवाद से प्रभावित जिले रहे हैं।

अगस्त में फिर हुई गोलीबारी

सीमा विवाद को लेकर हाल के दिनों में भी हिंसक घटनाएं हुई हैं। 10 अगस्त को धेमाजी जिले में कम से कम 12 लोग घायल हुए थे। आरोप है कि अंतरराज्यीय सीमा के पास जमीन पर कथित आतिक्रमण को लेकर अरुणाचल प्रदेश की तरफ से आए लोगों ने गोलीबारी की। असम सरकार ने 29 जुलाई को विधानसभा में बताया था कि राज्य की करीब 83 हजार हेक्टेयर जमीन पर अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघायल और मिजोरम का कब्जा है।

 

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पूर्व पुलिस अधिकारी ने बताया शांति का फॉर्मूला

असम के पूर्व स्पेशल DGP पल्लब भट्टाचार्य ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि ज्यादातर सीमा विवाद गलत तरीके से सीमा निर्धारण किए जाने के कारण पैदा हुए। राज्यों के गठन के समय स्थानीय लोगों को पर्याप्त रूप से भरोसे में नहीं लिया गया। उन्होंने 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना के अलग होने का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच ऐसा सीमा विवाद नहीं हुआ, क्योंकि लोगों को सीमा के बारे में जानकारी दी गई और उनकी सहमति ली गई  थी।

 

पल्लब भट्टाचार्य ने सुझाव दिया कि विवादित इलाकों में केंद्र सरकार की अगुवाई में आर्थिक गतिविधियां शुरू की जानी चाहिए। इसमें दोनों राज्यों के स्थानीय लोगों को शामिल करने से रोजगार और विकास के अवसर बढ़ेंगे और सीमा विवाद से पैदा होने वाला तनाव भी काम किया जा सकेगा।


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