पश्चिम बंगाल में 8 महीनों के लंबे गतिरोध के बाद वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 लागू हो गया है। ममता बनर्जी सरकार, संसद में इस कानून के पेश होने से लेकर लागू होने तक, मुखर होकर इसका विरोध करती रही है। महीनों तक उन्होंने कहा कि यह कानून, समाज के लिए विभाजनकारी है, यह अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार झुकते हुए कानून को मान लिया है।
राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 5 दिसंबर की समय-सीमा के भीतर वक्फ संपत्तियों के विवरण सार्वजनिक किए जाएं। पश्चिम बंगाल में करीब 82,000 वक्फ संपत्तियां हैं, जिनका ब्यौरा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
ममता बनर्जी ने कहा था कि वह पश्चिम बंगाल में इस कानून को लागू नहीं होने देंगी। इसके खिलाफ प्रदर्शन भी हुए थे, लेकिन कानूनी लड़ाई में राज्य को राहत नहीं मिली। अब विभाग के सचिव पीबी सलीम ने गुरुवार देर शाम एक चिट्ठी जारी की। पश्चिम बंगाल में 8 सूत्री कार्य योजना तहत, सभी मुतवल्लियों को पोर्टल पर पंजीकरण और संपत्ति का विवरण अपलोड करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
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ममता सरकार क्या कह रही है?
राज्य सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून के कुछ विवादास्पद हिस्सों पर रोक लगा दी है, लेकिन कानून के तहत बने नियम अभी लागू हैं। नियम कहते हैं कि 6 दिसंबर तक सभी वक्फ संपत्तियों की जानकारी नए पोर्टल पर डालनी है। पश्चिम बंगाल ने कहा है कि पहले ww.wamsi.nic.in पर भी दस्तावेज दर्ज थे, नए पोर्टल पर डालने पर कोई ऐतराज नहीं है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि रिकॉर्ड सही रखने से वक्फ की जमीनें अडानी-अंबानी जैसे बड़े व्यापारियों के हाथ नहीं जाएंगी।
ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
केंद्र सरकार एक नया वक्फ संशोधन अधिनियम लेकर आई है। हम इसे बंगाल में लागू नहीं होने देंगे। वे बांटो और राज करो की राजनीति कर रहे हैं। हम इस नीति को नहीं मानेंगे। हमारा बंगाल सबको साथ लेकर चलने वाला राज्य है।
ममता वक्फ के खिलाफ क्यों थीं?
अप्रैल 2025 में ममता बनर्जी ने कहा था-
पश्चिम बंगाल में 33 फीसदी मुस्लिम आबादी है। सदियों से यहां रह रहे हैं। हम उनकी संपत्ति की सुरक्षा करेंगे। यह हमारी जिम्मेदारी है। जब हमारी नई सरकार केंद्र में आएगी तो हम इस कानून को रद्द करने के लिए संशोधन लाएंगे।
वक्फ अधिनियम को लागू करने के लिए ममता मान क्यों गईं?
- पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी निर्णायक स्थिति में है। ममता बनर्जी खुलकर कहती थीं कि 33 फीसदी आबादी के हकों के साथ वह कोई समझौता करने नहीं जाएंगी। वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ उन्होंन शुरू में बयान दिए लेकिन ज्यादार मुस्लिम संगठन शुरुआती विरोध के बाद चुप रहे। कुछ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में हैं दायर हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस अधिनियम के खिलाफ नहीं है।
- केंद्र और राज्यों में टकराव होने की स्थिति में, केंद्र के फैसले राज्यों पर भारी पड़ते हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 254 कहता है, 'यदि कोई राज्य का कानून समवर्ती सूची के किसी विषय पर है और वह केंद्र के कानून से असंगत है, तो केंद्र का कानून प्रभावी होगा और राज्य का कानून उस सीमा तक निष्प्रभावी हो जाएगा।'
- संवैधानिक आधार पर ममता बनर्जी, इस कानून को अपने राज्य में लागू होने से नहीं रोक सकती थीं। यह उनके लिए कानूनी बाध्यता की तरह रही है। केंद्र सरकार के स्पष्ट कानून से सीधा टकराव होने पर प्रशासनिक विवाद होता।
- केंद्र का दावा है कि वक्फ कानून, मुस्लिमों से उनकी जमीन छीनने के लिए नहीं, बल्कि जमीन बचाने के लिए है। केंद्र का तर्क है कि इस अधिनियम में पारदर्शिता आई है। ममता सरकार के पास इसे खारिज करने के लिए उचित तर्क नहीं थे। यह कानूनी बाध्यता थी, जिसकी वजह से उन्होंने इसे स्वीकार किया है।
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BJP और विपक्ष ने ममता बनर्जी को क्या घेरा है?
CPM नेता सुजन चक्रवर्ती:-
यह साबित हो गया कि ममता बनर्जी भी आरएसएस की लाइन पर चल रही हैं। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करने का इनका दावा झूठा निकला।'
भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, 'ममता ने पहले कहा था कि बंगाल में वक्फ संशोधन कानून लागू नहीं होने देंगी। अप्रैल में संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुए, मुर्शिदाबाद के समसेरगंज में दंगे हुए, दो हिंदू भाई-बहन की हत्या हो गई, मालदा में हिंदुओं की दुकानें जलाई गईं। अब वही कानून मान रही हैं तो उन परिवारों से माफी मांगें और हिंसा करने वालों से नुकसान की भरपाई करवाएं।'