दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग वर्गों के आंदोलन तेज होने लगे हैं। इसी कड़ी में प्रदेशभर के कोटेदार मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ पहुंचे। ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के आह्वान पर जुटे कोटेदारों ने 90 रुपये प्रति कुंतल मिल रहे लाभांश को बढ़ाकर 200 रुपये करने की मांग की। कोटेदार चारबाग से विधानसभा तक पैदल मार्च कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें चारबाग में ही रोक दिया। बाद में प्रदर्शनकारियों को बसों से ईको गार्डन भेजा गया, जहां देर शाम तक प्रदर्शन जारी रहा।
कोटेदारों का कहना है कि राशन वितरण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें मिलने वाला लाभांश बेहद कम है। फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश तिवारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में उन्हें फिलहाल 90 रुपये प्रति कुंतल का लाभांश मिलता है। बढ़ती महंगाई और दुकान के संचालन से जुड़े खर्चों के बीच इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। कोटेदारों ने खाद्यान्न और चीनी वितरण पर मिलने वाले लाभांश में बढ़ोतरी, न्यूनतम आय की गारंटी और नियमित मानदेय की मांग उठाई है। साथ ही उनका कहना है कि कोरोना काल में मुफ्त राशन वितरण समेत कई मदों का भुगतान भी लंबित है।
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दूसरे राज्यों में कितना मिलता है कमीशन?
कोटेदारों ने दूसरे राज्यों में मिलने वाले कमीशन का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश में भी कम से कम 200 रुपये प्रति कुंतल भुगतान की मांग की है। उपलब्ध तुलनात्मक आंकड़ों के मुताबिक—
1. मिजोरम — 285 रुपये प्रति कुंतल
2. केरल — 271.73 रुपये प्रति कुंतल
3. दिल्ली — 200 रुपये प्रति कुंतल
4. हरियाणा — 200 रुपये प्रति कुंतल
5. हिमाचल प्रदेश — 180 रुपये प्रति कुंतल
6. राजस्थान — 129.70 रुपये प्रति कुंतल
इन आंकड़ों के आधार पर कोटेदारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में मिलने वाला 90 रुपये प्रति कुंतल लाभांश कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। यही वजह है कि वे इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में कमीशन, अतिरिक्त मार्जिन, सहायता भुगतान और न्यूनतम आय की व्यवस्था अलग-अलग हो सकती है। केंद्र की व्यवस्था के तहत सामान्य श्रेणी के राज्यों के लिए मूल मार्जिन 90 रुपये प्रति कुंतल और ई-पॉस के माध्यम से वितरण पर 21 रुपये अतिरिक्त मार्जिन का प्रावधान किया गया था।
चारबाग में रोका, ईको गार्डन भेजे गए प्रदर्शनकारी
मंगलवार को जौनपुर, प्रतापगढ़, वाराणसी, रायबरेली, उन्नाव और शाहजहांपुर समेत कई जिलों से कोटेदार लखनऊ पहुंचे। उनकी तैयारी चारबाग से विधानसभा तक पैदल मार्च करने की थी। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को बसों से ईको गार्डन भेजा गया। ईको गार्डन में कोटेदारों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की। कोटेदारों का कहना है कि उनकी मांग सिर्फ 200 रुपये प्रति कुंतल कमीशन तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार कोटेदारों के लिए नियमित मानदेय की व्यवस्था करे, न्यूनतम आय की गारंटी लागू करे, खाद्यान्न और चीनी वितरण पर मिलने वाले लाभांश में बढ़ोतरी करे और पुराने लंबित भुगतानों का तत्काल निस्तारण करे। उनका तर्क है कि जब राशन वितरण की जिम्मेदारी पूरे प्रदेश में एक जैसी है तो कोटेदारों के पारिश्रमिक में इतना बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए।
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अगस्त में राशन वितरण बंद करने का अल्टीमेटम
आंदोलन कर रहे कोटेदारों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो अगस्त में प्रदेशभर में राशन वितरण बंद किया जा सकता है। इससे आने वाले दिनों में मामला और तूल पकड़ सकता है। प्रदर्शन के दौरान अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद सत्यदेव ईको गार्डन पहुंचे। उन्होंने कोटेदारों से ज्ञापन लिया और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। हालांकि संगठन का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सरकार को कमीशन, मानदेय और न्यूनतम आय के मुद्दे पर ठोस फैसला लेना होगा।
उत्तर प्रदेश में कोटेदारों का यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है, जब अलग-अलग वर्ग अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कोटेदारों ने साफ कर दिया है कि 90 रुपये प्रति कुंतल की मौजूदा व्यवस्था उन्हें मंजूर नहीं है और वे 200 रुपये प्रति कुंतल कमीशन के साथ मानदेय व न्यूनतम आय की गारंटी चाहते हैं। सरकार अगर जल्द कोई फैसला नहीं करती है तो अगस्त में राशन वितरण बंद करने की चेतावनी आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दे सकती है।