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केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, SNDP के महासचिव पद से हटाए गए वेल्लापल्ली नतेसन

SNDP योगम के मुखिया वेल्लापल्ली नतेसन को केरल हाई कोर्ट ने उनके पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, इस संगठन के पूरे बोर्ड को ही अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

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वेल्लापल्ली नतेसन, Photo Credit: Social Media

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केरल के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हाई कोर्ट के एक फैसले ने खलबली मचा दी है। श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP)के मुखिया यानी महासचिव के पद से वेल्लापल्ली नतेसन को हटा दिया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता और लेखकर एम के सानू की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। SNDP केरल में एझावा समुदाय का सबसे बड़ा संगठन है और लंबे समय से वेल्लापल्ली नतेसन इसके मुखिया हैं। कुछ दिनों पहले ही वेल्लापल्ली नतेसन ने एलान किया था कि वह आगामी चुनाव में मौजूदा पिनराई विजयन सरकार का साथ देंगे।

 

SNDP एक सामाजिक संगठन है लेकिन इसे राजनीतिक तौर पर भी बेहद ताकतवर माना जाता है। मुस्लिमों के खिलाफ कई बार विवादित बयान देकर चर्चा में आ चुके वेल्लापल्ली नतेसन को हर पार्टी साधना चाहती है। उनके बेटे की अगुवाई वाली पार्टी NDA का हिस्सा है तो वह खुद इस बार लेफ्ट का समर्थन करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, लेफ्ट में ही शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) नतेसन को लेकर सहज नहीं है। 


क्या है मामला?

 

यह केस SNDP के संगठन के आंतरिक चुनाव का है। अब केरल हाई कोर्ट ने अब पूरे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को ही अयोग्य घोषित कर दिया गया है। वेल्लापल्ली नतेसन के बेटे तुषार वेल्लापल्ली को भी उनके पद से हटा दिया गया है। हाई कोर्ट ने पाया है कि इस संगठन ने लगातार तीन से साल कोई भी ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं जमा की है। कोर्ट के मुताबिक, कंपनीज ऐक्ट के तहत तय नियमों का पालन नहीं किया इसलिए डायरेक्टर समेत तमाम पदाधिकारियों को अयोग्य घोषित किया जा रहा है।

 

यह भी पढ़ें: केरल के 'हिंदूवादी नेता' वेल्लापल्ली नतेसन के लिए LDF में क्यों हो रहा टकराव?

 

बता दें कि यह याचिका SNDP योगम संरक्षण समिति की ओर से दायर की गई थी। इस समिति के चेयरमैन एम के सानू ने ही याचिका में इस संगठन के वित्तीय लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे और ऑडिट रिपोर्ट न जमा करने का मुद्दा उठाया था। एम के सानू ने अपनी याचिका में मांग उठाई थी कि संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को उनके पद से हटाया जाए।

 

इससे पहले, अप्रैल 2024 में केरल के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन से भी एम के सानू ने यही अपील की थी लेकिन तब उनकी अपील खारिज कर दी गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि SNDP ने साल 2013 से 2016 तक यानी कि लगातार तीन साल ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं जमा की। 

कितना अहम है SNDP?

 

केरल में SNDP एझावा जाति के लोगों का बड़ा संगठन है। यह संस्था पूरे प्रदेश में शैक्षणिक संस्थान चलाती है और मेडिकल कैंप का भी आयोजन करती है। लगभग 23 प्रतिशत आबादी वाले एझावा को साधने के लिए SNDP को अहम जरिया माना जाता है इसीलिए हर राजनीतिक दल वेल्लापल्ली नतेसन को साधना चाहता है।

 

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एक रोचक बात यह है कि अब लेफ्ट का समर्थन कर रहे वेल्लापल्ली नतेसन के बेटे तुषार वेल्लापल्ली भारत धर्म जन सेना (BDJS) के मुखिया हैं और यह पार्टी NDA के साथ है। वेल्लापल्ली खुद राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहते जरूर हैं लेकिन पार्टियों से सीधे तौर पर संबंध नहीं रखते।

 


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