logo

मूड

ट्रेंडिंग:

26 दिन तक नहीं जली चिता, अब झोटा का अंतिम संस्कार, मान गए घरवाले?

नशे के खिलाफ बोलने की वजह से एक दुकान पर परविंदर सिंह झोटा की हत्या हुई थी। 13 अक्टूबर से लेकर अब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं पाया।

परविंदर सिंह झोटा। Photo Credt: PSJ/X

परविंदर सिंह झोटा। Photo Credt: PSJ/X

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

पंजाब में नशे के खिलाफ जंग छेड़ने वाले एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार 26 दिनों बाद उनके पैतृक गांव में हुआ है। चकेरियां रोड पर झोटा के खेतों में उनकी चिता को अग्नि दी गई। चंडीगढ़ के PGIMER में शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को यहां लाया गया था। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

परविंदर सिंह झोटा को 13 अक्टूबर को मानसा शहर के एक व्यस्त बाजार में दिनदहाड़े गोली मारी गई थी। वह एक मेडिकल स्टोर पर फेसबुक लाइव कर रहे थे। उन्होंने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचे जाने पर दुकान मालिक से सवाल किया था। इसके बाद दुकान मालिक ने उन पर गोली चला दी। आरोपी दुकान मालिक को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

यह भी पढ़ें: परविंदर सिंह झोटा मर्डर केस: मानसा में मेडिकल हॉल पर सीबीआई की दबिश से हड़कंप

22 दिन के धरने के बाद सरकार से बनी सहमति

झोटा के पिता भीम सिंह ने पंजाब के युवाओं से नशे के खिलाफ संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने इस बुराई से लड़ते हुए जान दी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) का धन्यवाद करते हैं, जो पूरे समय उनके साथ खड़ी रही। JAC को परमिंदर सिंह झोटा इंसाफ एक्शन कमेटी भी कहा जाता है। यह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में बनी अलग-अलग सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं की संयुक्त समिति है।

 

झोटा के शव को शुक्रवार तड़के मानसा सिविल अस्पताल के मुर्दाघर से PGIMER चंडीगढ़ लाया गया। इससे पहले 4 नवंबर को पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद परिवार ने 22 दिन पुराना धरना खत्म किया और पोस्टमार्टम के लिए सहमति दी। परिवार और JAC इंसाफ की मांग को लेकर मानसा में धरने पर बैठे थे।

इंसाफ मांगने वालों को पकड़ा क्यों गया?

28 अक्टूबर को धरने के दौरान JAC के दो सदस्यों लखवीर सिंह और मोहनजीत सिंह शेरों को गिरफ्तार किया गया था। 4 नवंबर की बैठक में विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां समेत सरकार के प्रतिनिधि शामिल थे। इसके बाद 5 नवंबर की शाम दोनों सदस्यों को नाभा जिला जेल से रिहा कर दिया गया। इस घटना से पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। राज्य में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। 

यह भी पढ़ें: खुद नशा करते थे, फिर कैसे बने एंटी ड्रग एक्टिविस्ट, परविंदर सिंह झोटा की कहानी

बढ़ते नशे पर घिर गई है AAP सरकार

विपक्ष ने राज्य में कथित नशे की समस्या को लेकर AAP सरकार पर निशाना साधा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस के सचिन पायलट, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों समेत कई नेता झोटा के परिवार से मिलने पहुंचे। JAC मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव के इस्तीफे की मांग करती रही।

CBI कर रही है झोटा मामले की जांच

पंजाब सरकार ने परिवार की मांग पर झोटा की मौत की जांच CBI को सौंप दी थी। इस प्रकरण में एक थाना प्रभारी, एक डीएसपी और एक ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया था। परिवार झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने और घटना में घायल चार लोगों में से हर एक को मुआवजा देने की मांग कर रहा था। सरकार ने ये दोनों मांगें मान ली हैं। सरकार ने झोटा की प्रतिमा किसी पार्क या स्टेडियम में लगाने की मांग भी मानी है।

Related Topic:#Punjab News

और पढ़ें