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भैंस काटने पर रोक, चिड़ियाघर के जानवरों को बकरे का मांस खिलाने से बढ़ा खर्च

कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में मांसाहारी जानवरों को अब भैंस के मांस की जगह बकरे का मांस खिलाना पड़ रहा है। इससे चिड़ियाघर के भोजन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है।

Alipore Zoo Kolkata

अलीपुर चिड़ियाघर | Photo Credit: Social Media

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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में मांसाहारी जानवरों के भोजन को लेकर नई चुनौती सामने आई है। कोलकाता नगर निगम के बूचड़खाने में भैंसों के वध पर रोक लगने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन को शेर, बाघ और अन्य मांसाहारी जानवरों को अब भैंस के मांस की जगह बकरे का मांस खिलाना पड़ रहा है। इससे चिड़ियाघर में जानवरों के खाने पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है।

 

अधिकारियों के अनुसार, भैंस का मांस लंबे समय से मांसाहारी जानवरों के आहार का प्रमुख हिस्सा रहा है लेकिन इसकी आपूर्ति बंद होने के कारण अब बकरे के मांस की व्यवस्था करनी पड़ रही है। जो उसकी तुलना में अधिक महंगा है। इससे चिड़ियाघर के बजट पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जानवरों के भोजन और स्वास्थ्य से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

 

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कैसे लगी रोक?

सोमवार को यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है कि तंगरा स्थित केएमसी के बूचड़खाने में भैंस और गोवंश के अन्य पशुओं के वध पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्य में सत्ता में आने के बाद से रोक लगी हुई है। चिड़ियाघर को मांस की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों का आरोप है कि नगर निकाय ने उनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया है। जिसके कारण उन्हें कहीं अधिक महंगा बकरे का मांस खरीदना पड़ रहा है। हालांकि, इससे पहले चिड़ियाघर के आठ बाघों, भेड़ियों और एशियाई शेरों को भैंस का मांस खिलाया जाता था।

 

कोलकाता ने यह मामला हाल ही में वन मंत्री मनोज कुमार उरांव के साथ मांस आपूर्तिकर्ताओं की बैठक में प्रमुखता से उठाया। अधिकारी ने बताया कि किसी राज्य के वन मंत्री और मांस आपूर्तिकर्ताओं के बीच इस तरह की यह पहली बैठक थी। उन्होंने कहा कि मंत्री ने आपूर्तिकर्ताओं को आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए जल्द से जल्द केएमसी के साथ इस मामले को उठाएगी। अधिकारी ने कहा कि तब तक चिड़ियाघर के मांसाहारी जानवरों को बकरे का मांस ही दिया जाएगा और उनके भोजन की मात्रा या गुणवत्ता में कोई कमी नहीं की जाएगी।

 

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मांस पर कितना खर्च होता है?

चिड़ियाघर को हर साल लगभग 51,000 किलोग्राम भैंस के मांस की आवश्यकता होती है। बिना हड्डी वाले भैंस के मांस की कीमत लगभग 350 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि हड्डी सहित मांस की कीमत लगभग 270 रुपये प्रति किलोग्राम है। चिड़ियाघर हर साल लगभग 2,800 किलोग्राम भैंस का कीमा भी खरीदता है जिसकी कीमत 285 रुपये प्रति किलोग्राम है। चिड़ियाघर को सालाना केवल लगभग सिर्फ 980 किलोग्राम बकरे के मांस की आवश्यकता होती है। बिना हड्डी वाले बकरे के मांस की कीमत लगभग 728 रुपये प्रति किलोग्राम है और हड्डी सहित मांस की कीमत लगभग 695 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि बकरे के कीमे की कीमत लगभग 726 रुपये प्रति किलोग्राम है।

 

बकरे के मांस पर निर्भर होने के बाद चिड़ियाघर का खर्च काफी बढ़ गया है। अधिकारी ने कहा, 'कोलकाता में बकरे और मेमने के मांस की अधिक मांग के कारण चिड़ियाघर के भोजन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है। इसके अलावा बाघ और शेर जैसे बड़े मांसाहारी जानवर भैंस का मांस अधिक पसंद करते हैं जबकि फिलहाल उन्हें केवल बकरे का मांस ही मिल रहा है।'

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