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बलिया के सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स की नो-एंट्री, क्यों जारी हुआ सख्त आदेश?

बलिया के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया वालों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। फोटो-वीडियो बनाने पर भी पाबंदी रहेगी।

representative image of UP gov school

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सरकारी और सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में अब बिना अनुमति बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया चैनलों से जुड़े लोगों की एंट्री नहीं हो सकेगी। जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में बिना अनुमति फोटो और वीडियो बनाने पर भी रोक लगा दी है। विभाग का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखना और बच्चों की शिक्षा को बाहरी गतिविधियों से प्रभावित होने से बचाना है।

 

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष सिंह ने बताया कि इसको लेकर शुक्रवार को आदेश जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने या फोटो-वीडियो बनाने से पहले उनकी या किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लेना जरूरी होगा। BSA ने बताया कि प्रदेश के कुछ और जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं।

 

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क्यों जारी हुआ सख्त आदेश?

बलिया के बैरिया क्षेत्र में एक शिक्षक का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के कुछ दिन बाद यह आदेश जारी किया गया है। बताया गया कि एक सोशल मीडिया चैनल ने शिक्षक का वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह स्कूल में देर से पहुंचते दिखाई दिए। इसके बाद स्कूलों में बाहरी लोगों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की गतिविधियों को लेकर विभाग ने सख्ती बढ़ाने का फैसला किया। BSA मनीष सिंह ने कहा कि कुछ यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया यूजर्स के इस तरह स्कूलों में जाकर वीडियो बनाने से पत्रकारों की छवि भी प्रभावित हो रही है।

पत्रकारों को अनुमति लेकर मिलेगी एंट्री

BSA ने साफ किया कि आदेश का उद्देश्य अधिकृत पत्रकारों को स्कूलों में जाने से रोकना नहीं है। मान्यता प्राप्त या अधिकृत मीडिया प्रतिनिधि संबंधित अधिकारी से संपर्क कर स्कूल में रिपोर्टिंग कर सकेंगे। पत्रकारों को स्कूल में जाने और फोटो या वीडियो बनाने से पहले BSA या संबंधित खंड अधिकारी (BEO) से संपर्क करना होगा। अनुमति मिलने के बाद वे स्कूल परिसर में रिपोर्टिंग कर सकरेंगे।

 

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विभाग के मुताबिक, इस नियम का मकसद स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना, शिक्षकों का सम्मान बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह की अनधिकृत गतिविधि की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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