प्रयागराज माघ मेले के बीच योगी आदित्यनाथ ने धर्म और सनातन को लेकर तीखा संदेश दिया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि तमाम ऐसे कालनेमि हैं जो कि धर्म की आड़ लेकर सनातन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसे ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य के साथ शुरू हुए विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ शाही सवारी और पालकी के साथ संगम स्नान करने निकले थे। लेकिन मेला प्रशासन और पुलिस ने उनके काफिले को रोक दिया और उन्हें अन्य अखाड़ों की तरह सामान्य तरीके से स्नान करने की सलाह दी।
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हो गई थी धक्का-मुक्की
इस रोक के कारण वहां विवाद खड़ा हो गया, शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई और विवाद इतना बढ़ गया कि स्वामी जी ने स्नान का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे अपनी परंपरा और शंकराचार्य पद की गरिमा पर हमला बताया तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माफी की मांग की।
प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई तेज हो गई। पहले नोटिस जारी किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले का हवाला देकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 'शंकराचार्य' पद का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाया गया और स्पष्टीकरण मांगा गया। अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें सनातन धर्म के लिए औरंगजेब से भी बदतर बताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार सनातन परंपरा का अपमान कर रही है।
क्या बोले योगी?
योगी आदित्यनाथ ने सोनीपत (हरियाणा) में एक कार्यक्रम के दौरान बिना नाम कहा, एक सच्चे संत, योगी या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं होता। संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, धर्म ही उसकी संपत्ति है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है।’
उन्होंने कहा कि अगर कोई राष्ट्र के स्वाभिमान को चुनौती देता है, तो उसके सामने खुलकर खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि कई 'कालनेमि' जैसे लोग धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। रामायण में कालनेमि वह मायावी राक्षस था, जिसने संजीवनी बूटी लेने गए हनुमान जी को संत बनकर ठगने की कोशिश की थी, लेकिन हनुमान जी ने उसके छल को पहचानकर उसे मार गिराया।
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रामभद्राचार्य ने दी प्रतिक्रिया
इस बीच कई अन्य संतों और अखाड़ों ने भी प्रतिक्रिया दी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने मुख्यमंत्री योगी का समर्थन किया और कहा कि अगर कोई अन्याय हुआ है तो सरकार से बात करनी चाहिए, गाली-गलौज नहीं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य जैसे संतों ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्य को गलत ठहराया और पालकी से स्नान को परंपरा के विरुद्ध बताया। वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे सनातन का अपमान बताकर योगी सरकार पर हमला बोला। कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए, जैसे कि कवर्धा में यूपी सरकार का पुतला फूंका गया।