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दिल्ली में आए तूफान की IMD चेतावनी क्यों नहीं दे पाया? यहां जानें वजह

02 मई को दिल्ली में आए तूफान ने लोगों के मन में यह सवाल खड़ा किया कि IMD ने इसके लिए कोई अलर्ट क्यों नहीं जारी किया।

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सांकेतिक चित्र(Photo Credit: Canva Image)

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दिल्ली में शुक्रवार को तेज तूफान आया था, जिसकी रफ्तार करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इस तूफान के साथ सिर्फ तीन घंटे में लगभग 80 मिलीमीटर बारिश भी हुई। मौसम में अचानक से आए इस बदलाव ने लोगों के मन में सवाल उठाए हैं कि इस तूफान के लिए IMD ने समय रहते रेड अलर्ट क्यों नहीं जारी किया?

क्या हुआ गलत?

दिल्ली क्षेत्रफल में छोटा है और इसे मौसम विभाग अलग क्षेत्र के रूप में नहीं मानता। बल्कि दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ को एक ही मौसम क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से मौसम विभाग का कहना है कि उन्होंने एक दिन पहले ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, जिसमें दिल्ली भी शामिल थी।

 

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मौसम में अचानक बदलाव तब होता है जब कई सिस्टम एक साथ टकराते हैं। दिल्ली में वेस्टर्न डिस्टर्बेन्स की वजह से यह तूफान आया। यह डिस्टर्बेन्स मई महीने में अक्सर सक्रिय होता है और बारिश, ओलावृष्टि व तेज हवाएं लाता है। इस बार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आई नमी ने प्रभाव को और बढ़ा दिया।

मौसम भविष्यवाणी में चुनौतियां

आईएमडी तीन तरह की भविष्यवाणियां करता है, जिसमें महीने और मौसम आधारित, दूसरा तीन से पांच दिन के लिए  और तीसरा घंटे दर घंटे, रडार के आधार पर करता है, जिसे Nowcast कहते हैं।

 

Nowcast भविष्यवाणी रडार से मिलती है, जो आकाश में तुरंत हो रही गतिविधियों के आधार पर की जाती है। हालांकि, गड़बड़ यह है कि तूफान जैसे मौसमी बदलाव बहुत कम समय के लिए और छोटे क्षेत्र में होते हैं, जो आमतौर पर 15 किलोमीटर तक ही रहते हैं। इसलिए, इनकी सटीक भविष्यवाणी मुश्किल होती है।

 

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार, मौसम विभाग ने 1 मई से ही दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि रेड अलर्ट नहीं देने का कारण यह था कि तूफान बहुत अचानक था और उस समय रडार के जरिए ही उसे ट्रैक किया गया।

 

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भविष्य के प्रयास

भारत ने पिछले कुछ सालों में मौसम तकनीक में काफी सुधार किया है। पहले जहां देश में 26 रडार थे, अब 40 हो चुके हैं, जो देश के 85% हिस्से को कवर करते हैं। 'मिशन मौसम' के तहत इसे 126 रडार तक बढ़ाया जाएगा।

 

आईएमडी अब लाइटनिंग डिटेक्शन सिस्टम, न्यूमेरिकल मॉडल्स, माइक्रोवेव रेडियोमीटर और विंड प्रोफाइलर जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे तापमान और नमी की लगातार निगरानी की जा सके।  पिछले पांच सालों में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 40-50% का सुधार देखा गया है।

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