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अफ्रीकी देशों में अब तस्करी रोकने के लिए इंसानों की मदद करेंगे चूहे

अफ्रीकी देशों के बंदरगाहों पर तरस्करी को रोकने के लिए चूहे तैनात किए जा रहे हैं। आइए जानते हैं, कैसे काम करते हैं ये चूहे।

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तरस्करी को रोकने के लिए चूहे तैनात किए गए।(Photo Credit: apopo.org/ Web)

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अब अफ्रीकी देशों के बंदरगाहों पर एक नई तरह की सुरक्षा शुरू हो रही है, जिसमें इंसानों की बजाय खास तौर से प्रशिक्षित चूहे तैनात किए जाएंगे। ये चूहे कोई आम चूहे नहीं हैं, बल्कि यह हैं अफ्रीकी जायंट पाउच्ड रैट्स जो अपनी अच्छी सूंघने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, ये चूहे अब तस्करी रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

इन चूहों को लाल रंग की छोटी जैकेट पहनाई जाती है और उन्हें अवैध सामान को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन चूहों को ऐसी वस्तुओं की पहचान करने में माहिर बनाया जा सकता है, जो जानवरों से जुड़ी होती हैं- जैसे हाथी के दांत, गैंडे के सींग, पेंगोलिन की खाल आदि।

 

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कैसे होती है तस्करी?

पश्चिमी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पर्यटक वन्यजीवों को देखने आते हैं लेकिन शिकार और तस्करी की वजह से कई प्रजातियां धीरे-धीरे गायब हो रही हैं। शिकारी जानवरों को पालने या उनके अंगों के लिए मार डालते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ लोग जिंदा गैंडों के सींग काट लेते हैं या हाथियों को मारकर उनके दांत निकाल लेते हैं। इन चीजों को फिर दूसरे देशों में ऊंचे दामों में बेचा जाता है।

कैसे काम करते हैं ये चूहे?

इसाबेल सॉट, एक व्यवहारिक जीव वैज्ञानिक, तंजानिया स्थित एक संगठन APOPO के साथ काम कर चुकी हैं। इस संगठन ने पहले भी इन चूहों को टीबी जैसी बीमारियों को सूंघने और बारूद खोजने के लिए प्रशिक्षित किया है।

 

अब शोधकर्ताओं ने 11 चूहों को एक बड़े बॉक्स के बने लैब में ट्रेनिंग दी। वहां 10 छोटे चैंबर बनाए गए, जिनमें अलग-अलग वस्तुओं के नमूने रखे गए। कुछ नमूने संकटग्रस्त जानवरों से जुड़े थे, तो कुछ नहीं। चूहों को उस गंध पर 3 सेकंड तक नाक टिकाए रखने पर खाना दिया जाता, जिससे उन्हें यह सीखने में मदद मिली कि कौन सी गंध 'टारगेट' है।

 

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यह चूहे खासतौर पर पेंगोलिन की खाल, हाथी दांत, गैंडे के सींग और अफ्रीकी ब्लैकवुड (जो संगीत उपकरणों में उपयोग होती है) को सूंघकर पहचानने में सक्षम हो गए।

आगे की काम

शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रयोगशाला में सफल होने के बाद कुछ चूहों को नकली गोदामों और असली बंदरगाहों में अभ्यास कराया गया। भविष्य में ये चूहे तस्करी रोकने में पुलिस और कस्टम अधिकारियों की मदद कर सकते हैं। जब ये चूहे बूढ़े हो जाते हैं, तब उन्हें रिटायर कर दिया जाता है। फिर वे फलों, सब्जियों और सूखी मछली के साथ आरामदायक जीवन बिताते हैं।

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