आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से शनिवार 18 जुलाई को भारत के अंतरिक्ष इतिहास का एक नया अध्याय लिखा गया। हैदराबाद की एक प्राइवेट कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने 'विक्रम-1' रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। भारत ने पहली बार जब अपना सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा था, तब से अंतरिक्ष मिशनों की पहचान सिर्फ ISRO हुआ करता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है।
विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के बाद अब स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है। जिसने अपना ऑर्बिटल रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है। 7 साल पहले ISRO के पूर्व वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने इस कंपनी की नींव रखी थी।
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कैसे हुई इस कंपनी की शुरुआत?
हाल ही में दिए अपने एक इंटरव्यू में पवन चंदाना ने बताया, उन्होंने 2018 में स्काईरूट की शुरुआत थी। तब उन्हें लगा था कि भारत में एक निजी रॉकेट कंपनी बनाने में ही करीब 10 साल लग जाएंगे। फंड जुटाना भी मुश्किल था, क्योंकि निवेशकों को भी भरोसा नहीं था कि कोई निजी कंपनी रॉकेट बना सकती है। न ही उस समय भारत में निजी स्पेस सेक्टर के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं थी।
भारत में निजी स्पेस सेक्टर के लिए नियम आसान होने के बाद यह कंपनी तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनियों में शामिल हो गई। बता दें कि भारत सरकार ने 2020 में स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था। इसके बाद निजी कंपनियों को भी रॉकेट बनाने, सैटेलाइट तैयार करने और उन्हें अंतरिक्ष में भेजने का काम करने की अनुमति मिल गई। इससे पहले यह जिम्मेदारी ISRO की थी।
विक्रम-S से मिली थी पहली सफलता
स्काईरूट ने इससे पहले 2022 में विक्रम-S नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था। यह भारत की पहली निजी कंपनी का रॉकेट था, जिसने भारतीय जमीन से अंतरिक्ष तक सफल उड़ान भरी थी। इसके बाद कंपनी ने बीते शनिवार, 18 जुलाई को अपना पहला ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसके साथ ही कंपनी ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया।
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भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गई है। नई फंडिंग में कंपनी ने 6 करोड़ डॉलर (60 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं। इस निवेश के बाद कंपनी की वैल्यू 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। इस साल Skyroot भारत की चौथी यूनिकॉर्न स्टार्टअप बनी है।
इंडियन स्पेस एसोसिएशन का मानना है कि कंपनी के यूनिकॉर्न बनने से निवेशकों का भरोसा और बढ़ेगा। भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्काईरूट भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की सबसे प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी भविष्य में सैटेलाइट लॉन्च सेवाओं को वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।