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10 लाख से शुरू होगी कीमत, बिना इंटरनेट चलेगा AI, स्पेशल क्यों है AI बॉक्स?

जल्द ही एक ऐसा डिवाइस आने वाला है जो AI वाले तमाम काम बिना इंटरनेट के ही कर डालेगा। यह डिवाइस उन कंपनियों के लिए है जिनके पास हर दिन बड़े स्तर पर डेटा इकट्ठा होता है।

ai box

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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अगर आप भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हैं तो उसके लिए सबसे जरूरी क्या है? कंप्यूटर और इंटरनेट। अब एक देसी कंपनी ने एक ऐसी डिवाइस बना डाली है जिसके जरिए आप बिना इंटरनेट के ही AI का इस्तेमाल कर सकेंगे। KOGO नाम की कंपनी इसे AI बॉक्स कहती है। यह कंपनी उन लोगों के लिए AI बॉक्स लाई है जिनकी सुरक्षा को इंटरनेट के इस्तेमाल से खतरा हो सकता है। यही वजह है कि इस एक बॉक्स की कीमत 10 लाख रुपये से शुरू हो रही है और AI समिट 2026 में इसे पेश किए जाने के बाद से ही यह AI बॉक्स चर्चा में आ गया है।

 

इस कंपनी ने Nvidia और Qualcomm से भी पार्टनरशिप की है और उनके एजेंटिक स्टैक का इस्तेमाल कर रहे हैं। हार्डवेयर Nvidia का है। Arinox AI, KOGO और CommandCORE के साथ आने से बना यह सिस्टम बिना इंटरनेट के ही काम करने में सक्षम है। 

 

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हिंदुस्तान टाइम्स अखबार से बातचीत में KOGO AI के CEO और को-फाउंडर राज गोपालकृष्णन ने कहा है, 'AI का फ्यूटर इंटरप्राइज लेवल पर भी प्राइवेट है। आप अपनी इंटेलिजेंस को सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं। कोई कंपनी अपने AI को प्राइवेट रखकर ही अपनी लर्निंग और इंटेलिजेंस को बढ़ा सकती है। यानी आपका AI खुद का होना चाहिए।'

क्या है AI बॉक्स?

 

इस कंपनी ने Nvidia का हार्डवेयर इस्तेमाल किया है। ऑपरेटिंग सिस्टम खुद KOGO का है। 500 से ज्यादा कनेक्टर्स वाला एंटप्राइज एजेंट सूट है जो वर्कफ्लो को मेनटेन करता है और यह सब एक देसी AI मॉडल पर चलता है। कुल मिलाकर यह एक छोटा सा बॉक्स जैसा डिवाइस है जिसे आप इस्तेमाल करके अपने काम बिना इंटरनेट के कर सकते हैं।

 

आपको बस यह AI बॉक्स लेना है और अपने कंप्यूटर से अटैच कर देना है। यह अपना काम शुरू कर देगा। मुख्य रूप से यह बड़ी संस्थाओं के लिए बनाया गया है। उदाहरण के लिए- अगर एक बैंक में हर दिन लाखों फाइल तैयार होती हैं और कई लोग बैठकर इन फाइल को देखते हैं, उन्हें प्रोसेस करते हैं और कहीं भेजते हैं तो यह बॉक्स ये सारे काम अकेले कर सकता है।

 

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कंपनी का दावा है कि इस डिवाइस के इस्तेमाल से बड़ी कंपनियां अपने खर्च को कम से कम 40 पर्सेंट कमी ला सकती हैं। 19 अप्रैल 2026 से इस डिवाइस की बिक्री शुरू कर दी जाएगी। 

 

इसके अलग-अलग वर्जन भी तैयार किए गए हैं। Arinox AI के मुख्य प्रवक्ता अंगद अहलूवालिया इसके बारे में बताते हैं कि इसके जरिए आपको हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और ऐप्लिकेशन के झमेले में नहीं पड़ना पड़ेगा। उनके मुताबिक, यह सबकुछ अकेले ही संभाल सकता है और बड़े स्तर पर काम कर सकता है। अगर ज्यादा काम हो तो ऐसे कई बॉक्स लगाकर आप काम बढ़ा सकता है। इसकी कीमत 10 लाख रुपये से शुरू होगी। इसका छोटा वाला वर्जन 100 करोड़ से 700 करोड़ पैरामीटर्स वाले मॉडल को रन कर सकता है। इसका मतलब है कि यह कई AI एजेंट्स का काम कर सकता है। वहीं, मीडियम लेवल का मॉडल 2 से 3 हजार करोड़ पैरामीटर्स रन कर सकता है।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

 

इसके पीछे का बेसिक कॉन्सेप्ट यह है कि बहुत सारे संस्थान जब AI का इस्तेमाल करने के लिए प्रॉम्प्ट डालते हैं तो वे अपनी बहुत सारी जानकारी सार्वजनिक कर रहे होते हैं। इसके बारे में HiddenLayer की AI थ्रेट लैंडस्केप 2025 अनैलसिस में कहा गया है कि 88 पर्सेंट कंपनियां ऐसी हैं जो थर्ड पार्टी AI का इस्तेमाल करने की वजह से डरी हुई हैं। उन्हें चिंता है कि गूगल जेमिनी, चैटजीपीटी और माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट जैसे AI टूल्स उनके डेटा का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

 

इसकी जरूरत को लेकर गोपालकृष्णन कहते हैं, 'एक उदाहरण से समझिए। अगर कोई कंपनी बैटरी चार्जिंग स्टेशन चलाती है तो वह हर दिन लगभग 30 TB डेटा जेनरेट कर सकती है। अगर उसके पास 1000 चार्जिंग स्टेशन हों तब भी उसे यह सारा डेटा क्लाउड पर भेजना होगा और उस स्थिति में आप सोच लीजिए कि कितने रुपये खर्च हो जाएंगे। इसका विकल्प प्रोसेसिंग है। एक छोटा सा डिवाइस हर चार्जिंग स्टेशन पर लगा देने से वह सिर्फ 200 GB डेटा ही भेजेगा।'

 


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