AI वॉयस क्लोनिंग स्कैम आज के समय में फ्रॉड करने वालों का एक नया तरीका बन चुका है। इसमें धोखेबाज नई तकनीक की मदद से किसी भी इंसान की बिल्कुल असली जैसी आवाज बना लेते हैं। इसके बाद वे उनके दोस्तों या परिवार वालों को कॉल करते हैं और झूठी मुसीबत की बात कहकर उनसे रुपये और निजी जानकारी, जैसे एटीएम पिन, सीवीवी या ओटीपी मांगकर ठगी करते हैं।
इस फ्रॉड की शुरुआत हमारी सोशल मीडिया की आदतों से होती है। जब हम इंटरनेट पर व्लॉग, रील्स, पब्लिक वीडियो या ऑडियो क्लिप शेयर करते हैं तो फ्रॉड करने वाले वहां से हमारी या हमारे किसी रिश्तेदार की सिर्फ 5 से 10 सेकंड की आवाज का सैंपल रिकॉर्ड कर लेते हैं। नकली आवाज बनाने के लिए इतनी छोटी क्लिप ही काफी होती है।
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कैसे काम करता है यह फ्रॉड
आवाज का सैंपल मिलने के बाद धोखेबाज उसे एक एडवांस AI सॉफ्टवेयर में डाल देते हैं। यह सॉफ्टवेयर उस आवाज की टोन, पिच और बात करने के स्टाइल को पूरी तरह कॉपी कर लेता है। इसके बाद पीड़ित को अचानक फोन किया जाता है और कहा जाता है कि उनका कोई अपना बहुत बड़ी मुसीबत, एक्सीडेंट या पुलिस केस में फंस गया है। अचानक आई इस कॉल से सामने वाला घबरा जाता है। फ्रॉड करने वाले पीड़ित पर इतना ज्यादा दबाव बनाते हैं कि उसे सोचने या सच जानने का मौका ही नहीं मिलता और वह तुरंत यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या वॉलेट से रुपये ट्रांसफर कर लेता है। बाद में उसे पता चलता है कि उसके साथ धोखा हुआ है।
खास बातों का दें ध्यान
अगर आपको कभी ऐसी कोई संदिग्ध कॉल आए तो बातचीत के दौरान कुछ खास बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले बात करते समय गौर करें कि क्या आवाज में कोई रोबोटिक ठहराव है या बातचीत का तरीका कुछ अजीब और बनावटी लग रहा है। इसके साथ ही अगर कोई फोन पर बहुत ज्यादा जल्दबाजी दिखाए और बिना सोचे-समझे तुरंत रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाए तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
अक्सर ये कॉल किसी बिल्कुल नए नंबर इंटरनेशनल नंबर या किसी ऐप द्वारा बदले गए नंबर से आती हैं। कई बार जालसाज खुद को बड़ा अधिकारी बताकर आपसे नॉर्मल सुरक्षा नियमों या पेमेंट के नियमों को तोड़ने को कहते हैं जिसे कभी नहीं मानना चाहिए।
बचाव के 6 आसान तरीके
जल्दबाजी में रुपये न भेजें: किसी भी वीडियो या ऑडियो कॉल के भरोसे आकर जल्दबाजी में तुरंत किसी के खाते में रुपये ट्रांसफर न करें चाहे मामला कितना भी जरूरी क्यों न लगे।
करीबियों से दोबारा कंफर्म करें: रुपये भेजने से पहले उस रिश्तेदार या दोस्त के दूसरे नंबर पर फोन करके या उनके आस-पास के लोगों से बात करके असलियत का पता लगाएं।
सोशल मीडिया पर ध्यान दें: सोशल मीडिया पर अपनी आवाज वाले लंबे वीडियो या ऑडियो क्लिप्स को पब्लिकली शेयर करने से पहले अच्छी तरह सोच लें ताकि आपकी आवाज का गलत इस्तेमाल न हो सके।
बैंक खातों में सुरक्षा लिमिट: अपने बैंक अकाउंट्स और बैंकिंग ऐप्स में रोजाना की ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करके रखें, डेबिट अलर्ट हमेशा चालू रखें और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) का इस्तेमाल करें।
दबाव में जानकारी न दें: हमेशा याद रखें कि कोई भी बैंक, आरबीआई या सेबी का अधिकारी कभी भी फोन पर दबाव बनाकर रुपये नहीं मांगता और न ही आपसे ओटीपी, सीवीवी या पिन जैसी निजी जानकारियां पूछता है इसलिए दबाव में आकर ऐसी जानकारी कभी न दें।
कॉल के सोर्स की जांच: हमेशा फोन करने वाले के सही सोर्स की जांच करें और किसी भी अनजान सोर्स पर भरोसा न करके जरूरत पड़ने पर तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन की मदद लें।
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फ्रॉड होने पर कहां शिकायत दर्ज करें?
अगर कोई व्यक्ति इस फ्रॉड का शिकार हो जाता है और उसका पैसा कट जाता है तो बिना डरे तुरंत इन आधिकारिक जगहों और लिंक्स पर संपर्क करके रिपोर्ट कर सकते है।
नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल: सबसे पहले नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल की ऑफिशियल वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाएं या उनके राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करवाएं।
बैंक हेल्पलाइन नंबर: अपने बैंक (जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत फोन करें और फ्रॉड की जानकारी देकर अपने खाते व कार्ड को ब्लॉक करवाएं।
संचार साथी प्लेटफॉर्म: किसी भी संदिग्ध कॉल या फ्रॉड के अनुभव को शेयर करने के लिए आप संचार साथी की आधिकारिक वेबसाइट sancharsaathi.gov.in पर जा सकते हैं। वहां 'रिपोर्ट साइबर फ्रोड ट्रेंड्स' सेक्शन में मदद मिलेगी या फिर सीधे उनके फीडबैक लिंक sancharsaathi.gov.in/Home/ss-feedback.jsp पर क्लिक करके अपनी शिकायत और सुझाव सबमिट कर सकते हैं।
पुलिस स्टेशन में एफआईआर: इन सब डिजिटल कदमों के साथ-साथ अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर एक एफआईआर जरूर दर्ज करवाएं और उस एफआईआर की एक कॉपी भविष्य की कानूनी जरूरत के लिए अपने पास संभाल कर रखें। AI के इस दौर में खुद को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा तरीका हमेशा अपडेट रहना और जागरूक रहना है।