महाराष्ट्र की 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत महिलाओं को हर महीने मिलने वाले 1500 रुपये को अब बढ़ाया जा सकता है। लगातार बजट की तंगी और ई-केवाईसी के बाद अयोग्य नाम काटे जाने की खबरों के बीच केंद्र सरकार की आर्थिक सलाहकार समिति ने इस योजना की सराहना की है। मंगलवार 7 जुलाई को केंद्र सरकार की समिति ने महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना और ओडिशा की सुभद्रा योजना की जांच की। इस जांच में यह बात सामने आई कि महिलाओं को मिल रही आर्थिक मदद से उनके जीवन स्तर में काफी सुधार आया है। महिलाओं ने इस राशि का दुरुपयोग नहीं किया है बल्कि इन पैसों से उन्होंने बच्चों-बेटियों की पढ़ाई की जरूरतों को पूरा किया। यह पैसा उनकी पारिवारिक जरूरतों और जीवन सुधारने जैसे कार्यों में काम आ रही हैं। इसी वजह से समिति ने महंगाई के हिसाब से योजना की राशि बढ़ाने की भी सिफारिश की है।
शिवसेना एमएलसी नीलम गोर्हे के मुताबिक, कई महिलाओं ने इन पैसों से बचत भी की है। शिवसेना की ही नेता मनीषा कायनाडे ने भी इस बात की पुष्टि की है कि केंद्र ने योजना की सराहना की है और इसका पैसा बढ़ाने की बात कही है। मनीषा कायनाडे के मुताबिक, केंद्र सरकार अगर अपना योगदान देती है तो इसे बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में महिलाओं को 1500 रुपये प्रति महीने के हिसाब से मिलते हैं लेकिन महायुति सरकार पहले ही इसे बढ़ाकर 2100 रुपये तक करने की बात कह चुकी है।
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जून और जुलाई महीने की किस्त पर अपडेट
योजना के तहत पात्र महिलाओं को अपने जून और जुलाई महीने की किस्त का भी इंतजार है। इस योजना की जो पिछली किस्त आई थी वह 15 मई के आसपास महिलाओं के बैंक खातों में भेजी गई थी। चूंकि मई के बाद से अगली किस्त नहीं आई है, पूरी संभावना जताई जा रही है कि 15 जुलाई तक महिलाओं के बैंक खातों में जून और जुलाई दोनों महीनों की किस्तें एक साथ भेजी जा सकती हैं। हालांकि, अभी तक सरकार की तरफ से इस तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
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ई-केवाईसी की डेडलाइन खत्म
योजना में आ रही गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की शिकायतों को रोकने के लिए सरकार ने सभी के लिए ई-केवाईसी करवाना जरूरी कर दिया था। इसके लिए आखिरी तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की गई थी। यह समय खत्म होने के बाद सरकार ने पूरी लिस्ट की बारीकी से जांच की। इस जांच में जो लोग भी अयोग्य पाए गए उनके नाम बड़े पैमाने पर सरकारी लिस्ट से हटा दिए गए हैं ताकि योजना का पैसा सिर्फ सही और जरूरतमंद महिलाओं को ही मिल सके।