भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पैसों के लेन-देन को लेकर बहुत जरूरी नियम बनाए हैं। आरबीआई ने कहा है कि बैंक अपनी सभी शाखाओं में एक ही दिन जमा होने वाले एक जैसे पैसों पर सभी ग्राहकों को एक बराबर ब्याज दें और किसी के साथ भी कोई भेदभाव न करें। इसके साथ ही ज्यादा पैसा या बल्क डिपॉजिट के मामले में बैंकों को थोड़े लचीले नियम और छूट भी दी गई है ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से फैसले ले सकें। ये सभी नए नियम आने वाली 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। इसी बीच, नियमों को तोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक, बैंक जो भी ब्याज कीमतें तय करते हैं। वे उनकी वेबसाइट पर पहले से लिखी और बताई गई कीमतों के बिल्कुल बराबर होनी चाहिए। ऐसा बिल्कुल नहीं चलेगा कि बैंक अपनी मर्जी से एक ही दिन आने वाले एक जैसे पैसों पर अलग-अलग लोगों को अलग-अलग ब्याज दें। यह नियम देश के हर बैंक और उसकी हर शाखा पर एक जैसा लागू होगा ताकि काम में पूरी ईमानदारी और साफ-सुथरा माहौल बना रहे।
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बैंकों को मिलने वाली विशेष छूट
एक तरफ जहां आम लोगों के पैसे जमा करने के लिए बहुत कड़े नियम बनाए गए हैं वहीं दूसरी तरफ ज्यादा पैसों या थोक जमा के मामलों में बैंकों को थोड़ी राहत और छूट दी गई है। लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (LCR) के नियमों के तहत बैंक अपनी जरूरत के हिसाब से थोक जमा पर अलग ब्याज दरें रख सकते हैं लेकिन इसके लिए भी उन्हें सब बातें बिल्कुल साफ रखनी होंगी और नियमों का पालन करना होगा।
सब कुछ एकदम साफ और खुला रखने के लिए आरबीआई ने बैंकों को एक तय समय दिया है। सभी बैंकों को हर कामकाजी दिन पर सुबह 10:00 बजे तक अपनी वेबसाइट पर थोक जमा की ब्याज कीमतों को ऑनलाइन दिखाना होगा। बैंकों की सुविधा के लिए इसमें 10 मिनट का समय भी दिया गया है यानी हर हाल में सुबह 10:10 तक वेबसाइट पर सही और नई कीमतें दिख जानी चाहिए।
नियम लागू होने की तारीख
भारतीय रिजर्व बैंक के ये सभी नए और बदले हुए नियम 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में पक्के तौर पर लागू हो जाएंगे। इन नियमों को बनाने से पहले इसी साल जून के महीने में एक प्रस्ताव जारी किया गया था जिस पर लोगों और जानकारों से कई सुझाव मिले थे। उन सभी सुझावों की अच्छी तरह जांच करने और सोचने-विचारने के बाद ही इन नियमों को तय किया गया है।
नियमों को ठीक से न मानने के कारण एक दूसरा मामला भी सामने आया है जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक ने छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बैंक पर मुख्य आरोप यह है कि उसने अपने ही कर्मचारियों के खातों में तय नियमों से 1 प्रतिशत ज्यादा ब्याज का पैसा दे दिया था जो कि गलत था।
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बैंक में गड़बड़ी की जांच
इस गलती का पता तब चला जब नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) के रायपुर दफ्तर के अधिकारियों ने 15 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच इस बैंक की पूरी जांच की थी। जांच के दौरान सामने आया कि बैंक के पूरे 143 स्टाफ खातों में नियमों के खिलाफ जाकर 1 प्रतिशत अधिक ब्याज दे दिया गया है। इस गड़बड़ी की पूरी रिपोर्ट तुरंत आरबीआई को भेज दी गई थी।
इस गलती के सामने आने के बाद बैंक के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) सुधीर सोनी ने बताया कि नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की आपत्ति के बाद बैंक ने तुरंत कदम उठाया। बैंक ने उन 143 में से 106 खातों को बंद करवा दिया और लोगों से कुल 3 लाख 93 हजार रुपये की अतिरिक्त रकम वापस भी ले ली। हालांकि, नियमों को तोड़ने के कारण 23 जुलाई को भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था जिसे बैंक ने समय पर जमा भी कर दिया है।