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'न धमकी, न शाम 7 बजे के बाद फोन,' RBI ने लोन रिकवरी के लिए बनाए नए नियम

RBI ने लोन रिकवरी नियमों को लेकर सख्ती दिखाई है। अब किसी भी रिकवरी एजेंट का सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: Sora

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अब लोन वसूली में अब सख्त नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। गुरुवार को जारी एक ड्राफ्ट गाइडलाइन में कहा गया है कि बैंक के कर्मचारी या रिकवरी एजेंट अब कर्जदारों के साथ सख्ती से नहीं पेश आ सकते हैं। रिकवरी एजेंट, ग्राहकों को डरा और धमका नहीं सकते हैं। RBI के नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।

RBI के प्रस्तावित ड्राफ्ट का नाम RBI (कॉमर्शियल बैंक, रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्शन 2026 है। इसमें बैंकों और उनके रिकवरी एजेंट्स के लिए नए सख्त नियम बनाए गए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 की स्पीच में लोन रिकवरी में सुधार की बात कही थी।

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RBI की नई गाइडलाइन क्या कह रही है?

  • रिकवरी एजेंट्स अब धमकी, गाली-गलौज या अभद्र भाषा नहीं इस्तेमाल कर सकेंगे
  • कर्जदार के परिवार, दोस्तों या रिश्तेदारों को परेशान नहीं किया जा सकेगा
  • फोन कॉल्स या विजिट सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक ही हो सकेंगे
  • एजेंट अपनी पहचान बताने के लिए बाध्य होंगे
  • बैंक को पहले से एजेंट का नाम लिखित में देना होगा
  • बैंक को रिकवरी शुरू करने से पहले कर्जदार की शिकायतों का समाधान करना होगा 

और क्या होगा?

रिकवरी एजेंट की नियुक्ति से पहले उनके बैकग्राउंड के बारे में जांच की जाएगी। उनकी सही ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन पर जोर दिया जाएगा। बैंक को रिकवरी से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी। नए नियम अभी ड्राफ्ट में हैं। आम लोग, बैंक और दूसरे लोग 6 मार्च 2026 तक अपनी राय भेज सकते हैं। फाइनल अप्रूवल के बाद ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे कर्जदारों को राहत मिलेगी। 

 

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बैंकों के लिए नए नियम

हर बैंक को लोन वसूली और रिकवरी एजेंट लगाने की एक स्पष्ट पॉलिसी बनानी होगी। रिकवरी एजेंट की नियुक्ति से पहले उनकी अच्छी जांच करनी होगी, ट्रेनिंग देनी होगी और कोड ऑफ कंडक्ट फॉलो करना होगा। रिकवरी से जुड़ी शिकायतों के लिए बैंक में खास व्यवस्था होनी चाहिए। कई मामलों में कॉल रिकॉर्ड करने और कर्जदार को पहले से एजेंट की जानकारी देने जैसे नियम भी प्रस्तावित हैं।

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