logo

मूड

ट्रेंडिंग:

एक सन्यासी कैसे बने न्यूक्लियर साइंटिस्ट?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

शेयर करें

स्वामी ज्ञानानंद 10वीं क्लास में फेल हो गए, जिसके बाद उन्होंने हिमालय में दस साल तक मेडिटेशन किया। कुछ साल बाद उन्होंने यूरोप में पढ़ाई की थी। नोबेल प्राइज़ जीतने वाले फिजिसिस्ट जेम्स चैडविक के साथ काम किया। उसके बाद वापस आकर भारत की पहली यूनिवर्सिटी लेवल की न्यूक्लियर फिजिक्स लैबोरेटरी बनाई। यह स्वामी ज्ञानानंद की अविश्वसनीय सच्ची कहानी है, जो एक साधु थे और बाद में साइंटिस्ट बन गए।

 

Advertisement

ट्रेंडिंग वीडियो


और देखें