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दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद, अब विरोध करना महंगा?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड या सीबीडी ग्राउंड जैसे वैकल्पिक स्थानों पर प्रदर्शन करना होगा। इस बदलाव के बाद राजधानी में विरोध प्रदर्शन करने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी शर्तों पर बहस शुरू हो गई है।

दिए गए विवरण के अनुसार, रामलीला मैदान में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए शुरुआती तौर पर 1.21 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता है, जबकि वर्ष 2026 में केवल तीन तारीखें उपलब्ध होने का दावा किया गया है। यदि ये विवरण आधिकारिक नियमों और मौजूदा बुकिंग स्थिति से मेल खाते हैं, तो आयोजन की लागत और सीमित तारीखें प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। हालांकि, शुल्क, उपलब्ध तारीखों और अनुमति की शर्तों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों से करना आवश्यक है।

इस घटनाक्रम ने एक अहम संवैधानिक सवाल खड़ा किया है—क्या विरोध प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल करना आम नागरिकों और संगठनों के लिए महंगा होता जा रहा है? भारत में शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और विरोध जताने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) से जुड़ा है। हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य संवैधानिक रूप से वैध प्रतिबंधों के अधीन है। ऐसे में दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों से जुड़े नए नियमों, बुकिंग शुल्क और अनुमति प्रक्रिया का असर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर किस तरह पड़ता है, यह बहस का प्रमुख विषय बन गया है।

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