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RBI के रेपो रेट से EMI, FD और शेयर बाजार पर क्या असर पड़ता है?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट में बदलाव का असर आपके होम लोन की EMI, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले रिटर्न, महंगाई और शेयर बाजार पर कैसे पड़ता है? आखिर कोई केंद्रीय बैंक भविष्य में अपनी नीतियों को लेकर सिर्फ संकेत देकर भी अर्थव्यवस्था, निवेशकों और आम लोगों के फैसलों को कैसे प्रभावित कर सकता है?

इस इकोनॉमिक्स एक्सप्लेनर में अर्थशास्त्रियों रॉबर्ट हॉल और माइकल वुडफोर्ड के विचारों के जरिए परमानेंट इनकम हाइपोथिसिस (स्थायी आय परिकल्पना), रैशनल एक्सपेक्टेशंस (तर्कसंगत अपेक्षाएं), न्यू कीन्सियन मॉडल और फॉरवर्ड गाइडेंस की अवधारणाओं को समझाया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि 1970 के दशक में महंगाई और आर्थिक ठहराव यानी स्टैगफ्लेशन के दौरान पारंपरिक आर्थिक मॉडल के सामने क्या चुनौतियां आईं और लोगों की भविष्य को लेकर उम्मीदें उनके खर्च, बचत तथा कंपनियों के मूल्य निर्धारण के फैसलों को कैसे प्रभावित करती हैं।

इसके अलावा, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान केंद्रीय बैंकों के नीतिगत संचार की भूमिका और उसके बढ़ते महत्व की पड़ताल की गई है। भारत के कोविड-19 महामारी के दौर के अनुभवों पर भी चर्चा की गई है, जब RBI ने भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत देकर बाजार की अपेक्षाओं को प्रभावित करने की कोशिश की। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि ब्याज दरों में वास्तविक बदलाव के साथ-साथ केंद्रीय बैंक की घोषणाएं और भविष्य के नीतिगत संकेत भी अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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