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अमेरिका पर हमले को तैयार ईरान? जानें क्यों हो रही चर्चा

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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ईरान जल रहा है! 28 दिसंबर, 2025 से, आर्थिक संकट (बढ़ती महंगाई, रियाल का गिरना) ने सभी 31 प्रांतों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं — अब 47 साल की धार्मिक सरकार के बाद लोग सत्ता बदलने की मांग कर रहे हैं। तेहरान, मशहद और दूसरी जगहों पर "खामेनेई मुर्दाबाद" के नारे गूंज रहे हैं, महिलाएं पोस्टर जला रही हैं और भीड़ शेर और सूरज वाले झंडे लहरा रही है। 11 जनवरी, 2026 तक: 78–200 से ज़्यादा मौतों (CNN, अस्पताल, मानवाधिकार समूह) की खबरें हैं, 2,600 से ज़्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं, प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी हुई है। देश भर में इंटरनेट बंद (60+ घंटे) होने से कार्रवाई छिप रही है — सुप्रीम लीडर खामेनेई उन्हें "दंगाई" और "विदेशी एजेंट" कह रहे हैं। संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने चेतावनी दी है: "अगर हमला हुआ तो अमेरिका और इज़राइल के ठिकाने/जहाज सही निशाने होंगे!" ट्रंप का कड़ा रुख: "ईरानी आज़ादी चाहते हैं — अमेरिका मदद के लिए तैयार है!" उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हत्याएं जारी रहीं तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने आग्रह किया है: "सड़कों से मत हटो — शहरों पर कब्ज़ा कर लो!" 2025 के युद्ध के बाद इज़राइल हाई अलर्ट पर है। क्या यह खामेनेई के शासन का अंत है? क्या ट्रंप/इज़राइल दखल देंगे?

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