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क्या विज्ञान भी एक विश्वास प्रणाली है?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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क्या विज्ञान भी धर्म की तरह केवल एक विश्वास प्रणाली है, या इसकी कार्यप्रणाली इसे अलग बनाती है? इस वीडियो में विज्ञान के दर्शन (Philosophy of Science) के माध्यम से कार्ल पॉपर, डेविड ह्यूम और थॉमस कुहन के विचारों को सरल भाषा में समझाया गया है। इसमें आर्थर एडिंगटन के 1919 के ऐतिहासिक प्रयोग, जिसने आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत का समर्थन किया और न्यूटन की धारणाओं को चुनौती दी, के साथ इंडक्शन की समस्या, फाल्सिफिकेशन, वैज्ञानिक क्रांतियों और पैराडाइम बदलाव जैसी अवधारणाओं का विश्लेषण किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि विज्ञान की सबसे बड़ी ताकत उसकी आत्म-सुधार (Self-Correcting) क्षमता है, लेकिन नैतिकता, मूल्यों और जीवन के अर्थ जैसे प्रश्नों का उत्तर केवल विज्ञान नहीं दे सकता।

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