जटायु की वीरता और बलिदान की कहानी
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• Aug 10 2026
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रामायण में जटायु को साहस, निष्ठा और बलिदान के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। अरुण के पुत्र जटायु और उनके भाई संपाति ने बचपन में सूर्य की ओर उड़ान भरने का साहस किया था। बाद में जब रावण माता सीता का हरण कर ले जा रहा था, तब वृद्ध जटायु ने उनका रास्ता रोककर युद्ध किया। रावण से संघर्ष में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जटायु ने श्रीराम को सीता के हरण की महत्वपूर्ण जानकारी दी और अंततः अपने प्राण त्याग दिए। वाल्मीकि रामायण में वर्णित यह प्रसंग जटायु की निस्वार्थ निष्ठा और धर्म की रक्षा के लिए किए गए महान बलिदान को दर्शाता है। उनकी कहानी आज भी साहस और कर्तव्य की प्रेरणा देती है।
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