एक कंटेंट क्रिएटर का सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गया है, जिसमें उन्होंने अपने घर के पास वाले ड्राई क्लीनर की कमाई के बारे में बताया। इस पोस्ट ने लोगों को हैरान कर दिया है और इनमक व करियर को लेकर बहस छिड़ गई है।
एक्स पर नलिनी उनागर ने यह पोस्ट शेयर किया। उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से जिस ड्राई क्लीनिंग शॉप पर जाती हैं, वहां के मालिक से बात हुई। मालिक और उनकी पत्नी दोनों मिलकर काम करते हैं और दो हेल्पर रखते हैं, जिन्हें वे सैलरी देते हैं।
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2 लाख रुपये महीना इनकम
नलिनी ने लिखा, 'कल मैंने अपने घर के पास वाली ड्राई क्लीनिंग शॉप के मालिक से बात की। वह और उनकी पत्नी साथ काम करते हैं, दो हेल्पर हैं। जब उन्होंने बताया कि वे महीने में लगभग 2 लाख रुपये कमाते हैं, तो मैं चौंक गई। यह कमाई भारत में 10+ साल के अनुभव वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बराबर है।'
शेयर किया पूरा हिसाब
उन्होंने शॉप के मालिक से मिली आय का पूरा हिसाब भी शेयर किया। रोजाना करीब 350 कपड़े इस्त्री होते हैं, हर कपड़े पर 10 रुपये चार्ज। इससे रोज़ ₹3,500 की कमाई। इसके अलावा 20 भारी कपड़े जैसे सूट, चोली, प्रीमियम साड़ियां आदि ड्राई क्लीन और इस्त्री होते हैं, हर एक पर ₹350। इससे रोज़ ₹7,000 और। कुल मिलाकर रोज़ाना लगभग ₹10,500 की कमाई। महीने में सिर्फ 3 दिन छुट्टी होती है, तो महीने की कुल कमाई करीब ₹2,83,500 बनती है।
शॉप की जगह खुद की है, इसलिए किराया नहीं देते। खर्च में बिजली बिल लगभग ₹6,000 और दो हेल्पर की सैलरी ₹40,000। इन खर्चों को घटाने के बाद मालिक दंपति को करीब ₹2,37,500 का मुनाफा बचता है। नलिनी ने लिखा कि पिछले महीने का यह आंकड़ा था, लेकिन औसतन वे हर महीने 2 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं।
लोगों ने दिए रिएक्शन
यह पोस्ट देखकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। एक यूजर ने लिखा, 'इधर इंजीनियर रात 2 बजे कोड डिबग कर रहे हैं 2 लाख के लिए... और भैया 2 मिनट में झुर्रियां ठीक करके उतनी ही कमाई कर रहे हैं। सबक: सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की बजाय 'स्टीम इंजीनियरिंग' सीखनी चाहिए थी।'
दूसरे ने कहा, 'सबसे जरूरी बात, वे इस मुनाफे पर टैक्स नहीं देते! भारत के 80% लोग ऐसे ही हैं (कम या ज्यादा स्तर पर)। अगर आधे लोग भी नाममात्र टैक्स दें, तो बाकी लोगों पर बोझ कम हो जाए।'
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तीसरे यूजर का कमेंट था, 'सच्ची सीख यह नहीं कि आईटी छोड़कर दुकान खोल लो। असली बात यह है कि इनकम एजुकेशन से नहीं, बल्कि दी गई वैल्यू से जुड़ी होती है।'
एक और यूजर ने लिखा, 'हम सफेद कॉलर जॉब और फिक्स्ड सैलरी के पीछे भागते हैं, लेकिन ऐसी कहानियां याद दिलाती हैं कि छोटा-बड़ा बिजनेस चलाना भी उतना ही संतोषजनक हो सकता है, और कभी-कभी ज्यादा फायदेमंद भी, अगर दिल से किया जाए। इस नजरिए को शेयर करने के लिए शुक्रिया।'