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बिन ब्याही मां ने छोड़ दिया था 3 दिन का बच्चा, 41 साल बाद मेयर बनकर लौटा भारत

नीदरलैंड के एक शहर के मेयर भारत में अपनी मां की तलाश में आए हैं। उनकी मां ने उन्हें एक शेल्टर होम में छोड़ दिया था। अब 41 साल बाद वह शख्स अपनी मां को ढूंढ रहा है।

Falgun

पत्नी के साथ फाल्गुन, Photo Credit: Social Media

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एक मां अपने तीन दिन के बच्चे को एस शेल्टर होम में छोड़कर चली जाती है और वह बेटा करीब 41 साल बाद विदेश की धरती से अपनी मां की तलाश में भारत लौट आता है। उस बेटे के पास अपनी मां के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन उस शेल्टर होम में उस मां का नाम दर्ज है। अब वह बेटा कह रहा है कि उसकी मां शायद उससे मिलना चाहती हैं और वह उनकी तलाश कर रहा है। यह किसी फिल्म की कहानी लग रही है लेकिन ऐसा नहीं है। यह किसी व्यक्ति की असल जिंदगी की कहानी है। 

 

महाराष्ट्र के नागपुर में साल 1985 में एक अविवाहित मां ने अपने तीन दिन के बच्चे को एक शेल्टर होम में छोड़ दिया था। करीब एक महीने बाद नीदरलैंड से भारत घूमने आए एक कपल ने उसे गोद ले लिया और अपने साथ ले गए। अब करीब 41 साल बाद वह बच्चा अब नीदरलैंड की राजधानी के पास एक शहर का मेयर बन गया है। उनका नाम फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क है और वह अब हीम्सटेड के मेयर बनकर अपनी मां को ढूंढना चाहते हैं। वह अपनी मां की तलाश में आखिरी बार दिसंबर 2025 में भारत आए थे। 

 

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क्या बोले फाल्गुन?

फाल्गुन अब अपनी मां की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने महाभारत पढ़ी है और मुझे लगता है कि हर कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार है। मैं अपनी मां से सिर्फ एक बार मिलना चाहता हूं और बताना चाहता हूं कि मुझे बड़े प्यार से पाला गया है।' फाल्गुन के नाम के पीछे भी एक मजेदार कहानी है। शेल्टर होम में उनकी केयर टेकर ने नर्स ने उन्हें फाल्गुन नाम दिया था। हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन महीने में ही बच्चे का जन्म हुआ था। वह बीते साल तीन भारत भारत आए थे। वह भारत में उस नर्स से भी मिले और नर्स ने उन्हें बताया कि फाल्गुन नाम उसी ने रखा था। 

समाज के डर से मां ने छोड़ा

जब फाल्गुन ने अपनी मां के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया तो पता चला कि उनकी मां 21 साल की एक अविवाहिता थी। उनकी मां ने समाज के डर से फाल्गुन का पालन-पोषण ना करने का फैसला लिया और उसे शेल्टर होम में छोड़ दिया। डॉक्यूमेंट्स में फाल्गुन की मां का नाम दर्ज है और उसकी जानकारी उन्हें दे दी गई है। हालांकि, फाल्गुन ने अपनी मां का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। उनकी मां ने उन्हें मातृ सेवा संध में छोड़ा था जो अनाथ बच्चों और पीड़ित महिलाओं के लिए बनाया गया शेल्टर होम है। 

 

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नीदरलैंड में पले फाल्गुन

फाल्गुन नीदरलैंड में एक डच कपल के घर में पले-बढ़े हैं। उनके माता-पिता ने कम उम्र में ही उन्हें बता दिया था कि उनका मूल देश भारत है। बचपन में उन्हें भारत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन बड़े होने के साथ-साथ उनके मन में भारत आने की इच्छा जागने लगी थी। 

 

वह साल 2006 में पहली बार भारत आए थे। उन्होंने दक्षिण भारत की यात्रा की और वहां तरह-तरह के पकवान खाए। उन्हें इस यात्रा के दौरान भारत से जुड़ाव महसूस हुआ। फाल्गुन का कहना है कि उन्हें अपनी मां से मिलकर ऐसा ही लगेगा जैसा 40 साल बाद अपने बेटे से मिलकर एक मां को लगता है। फाल्गुन अब शादीशुदा हैं और उनके चार बच्चे भी हैं। वह अब अपनी मां की तलाश कर रहे हैं और उनसे एक बार मिलना चाहते हैं। 

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