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'गाय का दूध पीने से बच्चा बुद्धिमान, भैंस का पीने से बेकार', मंत्री का अजीब दावा

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धिमान होता है और भैंस का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धि से भ्रष्ट होता है।

madan dilawar cow milk

बाबा के साथ में मंत्री मदन दिलावर। Photo Credit (@madandilawar)

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मदन दिलावर राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं। मगर, उन्होंने रविवार एक ऐसा अवैज्ञानिक बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दरअसल, उन्होंने अपनी विधानसभा रामगंजमंडी के खेड़ली गांव से गोवर्धन गांव ग्वाला योजना को शुरू करने की घोषणा की। इस दौरान मदन दिलावर ने एक सभा को भी संबोधित किया। 

 

इसी समय शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धिमान होता है और भैंस का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धि से भ्रष्ट होता है। मदन दिलावर जब यह दावा कर रहे थे, तो उस समय श्रीराम स्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठ के जगतगुरु स्वामी रामदयाल महाराज भी मौजूद थे।

 

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5-7 गाय चुनने के लिए कहा

अपने दावों को सही ठहराने के लिए मंत्री ने कहा, '5-7 गाय ऐसी चुनिए जिन्होंने 3-4 दिन पहले अपने बच्चे को जन्म दिया है। ऐसी ही भैंसे चुनिए, उसके बाद भैंसे और गौ माताएं खड़ी कर दीजिए और उनके बच्चों को एक साथ छोड़ दीजिए। ऐसे में भैंस का बच्चा भागकर बड़ी मुश्किल से अपनी मां को मिलेगा... लेकिन गौ माता का बच्चा सीधा अपनी मां के पास चला जाएगा।'

 

 

 

गाय के गिनाए फायदे

मदन दिलावर ने कहा कि इसका मतलब है कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धिमान होता है और भैंस का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धि से भ्रष्ट होता है। उन्होंने आगे कहा गाय का बच्चा चंचल होता है यानी हमें अपने बच्चों को चंचल बनाना है तो हमें उन्हें गाय का दूध पिलाना चाहिए। मंत्री ने कहा, 'ऊंची पीठ वाली देसी गाय का दूध पीने वाला व्यक्ति बुद्धिमान बनता है, जबकि भैंस का दूध पीने वाले लोग सुस्त स्वभाव के हो जाते हैं।'

 

 

 

 

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ग्राम ग्वाला की होगी नियुक्ति

दिलावर ने घोषणा की कि क्षेत्र के 14 गांवों में गाय चराने की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए एक 'ग्राम ग्वाला' नियुक्त किया गया है। इसके तहत 70 से ज्यादा गायों के लिए एक ग्राम ग्वाला नियुक्त किया जाएगा। अगर संख्या 70 से ज्यादा है तो दो ग्वाले नियुक्त किए जाएंगे। हर ग्राम ग्वाले को 10,000 रुपए हर महीने दिए जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया कि यह व्यवस्था गांव के दानदाताओं के सहयोग से संचालित की जाएगी। 


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