उत्तर प्रदेश पुलिस के 'हाफ एनकाउंटर' पर काफी समय से सवालिया निशान उठते रहे हैं। विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया पर आम लोग भी पुलिस की इस 'एक जैसी' असामान्य कार्रवाई को लेकर यूपी पुलिस और सरकार को घेरते रहे हैं। दरअसल, आपने भी सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस या फिर यूपी एसटीएफ के चार-पांच पुलिस कर्मियों को किसी अपराधी के पैर में गोली मारी और उसके पास से तमंचा और बाइक बरामद की।
पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एनकाउंटर के तरीकों को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की थी। अब सहारनपुर जिले में कथित हाफ एनकाउंटर को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल सहारनपुर जिले के देवबंद के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ASJM) परविंदर सिंह का एक वीडियो वायरल है। वीडियो में जज परविंदर सिंह देवबंद जेल में कैदियों से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक कैदी ने कैमरे और जज के सामने पुलिस पर फर्जी तरीके से हाफ एनकाउंटर करने का आरोप लगाया।
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जेल पहुंचे थे जज
जज परविन्दर सिंह देवबंद जेल में शिकायत पर हाफ एनकाउंटर की जांच करने पहुंचे थे। उन्होंने हाफ एनकाउंटर में गोली खाकर जेल आए लोगों से बात की और पूछा कि गोली किस तरह से लगी? बंदियों ने बताया कि पुलिस कैसे हाफ एनकाउंटर करती है। बंदियो ने बताया कि पुलिस ने जमीन पर उन्हें लिटाया और एकदम पास से पैर में गोली मार दी। दो कैदियों ने जज को बताया कि पुलिस ने जमीन पर लिटाया, तब गोली मारी।
कैदी ने जज को क्या बताया?
एक कैदी ने बताया कि वह बागपत से सहारनपुर जा रहा था, जहां उसे कोर्ट में पेश होना था। उसने दावा किया कि पुलिस ने शामली जिले के एक पार्क से उसको उठा लिया, जिसकी पुष्टि उसकी मोबाइल लोकेशन से की जा सकती है। कैदी के मुताबिक, पुलिस चौकी पर ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। उसको बिजली का करंट लगाया गया और जबरदस्ती अपराध स्वीकार करने का दबाव बनाया गया।
कैदी ने आगे बताया कि देर शाम को उसे जंगल में ले जाया गया और थाने से लाई गई बाइक के पास खड़ा करके उसके पैर पर कपड़ा रखकर नजदीक से गोली मार दी गई। कैदी ने जज के सामने ही दावा किया कि पुलिस ने खुद से गोली मारकर इसे मुठभेड़ का नाम दे दिया। फिलहाल इस वीडियो के सामने आने के बाद यूपी पुलिस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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'प्रमोशन के लिए मार रहे गोली'
बता दें कि पिछले दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में आए दिन हो रहे एनकाउंटर और हाफ एनकाउंटर को लेकर गंभीर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि पुलिस सिर्फ प्रमोशन और सोशल मीडिया पर सुर्खिया बटोरने के लिए एनकाउंटर का सहारा ले रही है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है क्योंकि दंड देने का अधिकार केवल कोर्ट के पास है।
इस टिप्पणी के बाद हाई कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को तलब करते हुए पूछा था कि क्या पुलिस अधिकारियों को पैरों में गोली मारने का कोई लिखित या मौखिक आदेश दिया गया है। कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस अक्सर मामूली मामलों में भी मुठभेड़ का दिखावा करते हुए अंधाधुंध फायरिंग कर देती है, जबकि इन मुठभेड़ों में किसी अधिकारी को चोट नहीं लगी।