जमाना बदलता है। एक जमाने में क्लब, डिस्को, पब और रंगीन पार्टियों का शौक युवा करते थे, अब अध्यात्म की ओर बढ़ रहे हैं। बदलते वक्त में बढ़ता अवसाद, एकाकीपन और मानसिक तनाव के बढ़ते दौर में युवा, खुद को संभालने के लिए अध्यात्म और धर्म का सहारा ले रहे हैं। रैप, रॉक, पॉप, जैज, हिपहॉप की दुनिया में अब युवा 'भजन क्लबिंग' कर रहे हैं, ये नया माता का जगराता है, जिस पर युवा फिदा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी ने मन की बात के 128वें एपिसोड में युवाओं के इस क्रेज का जिक्र किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भजन क्लबिंग के बारे में बात करते हुए कहा है कि अब भजन को देश में हल्के में नहीं लिया जा रहा है, बिना शब्दों की मर्यादा टूटे युवाओं का मनोरंजन हो रहा है। देश के महानगरों में भजन क्लबिंग का क्रेज देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का ख्याल रखा जाता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:-
भजन क्लबिंग, जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता है, न शब्दों की मर्यादा टूटती है, न भाव की।
भजन क्लबिंग है क्या?
जेन जी इन दिनों नए स्टाइल में पार्टी कर रहे हैं। पारंपरिक क्लबों में तेज EDM बीट्स और शराब की जगह, युवा भजन गाकर नाच रहे हैं। जेन जी इसे भजन क्लबिंग कहते हैं। यह कोई धार्मिक अनुष्ठान या पूजा नहीं है। युवा मस्ती, जोश, एनर्जी और अध्यात्म की ओर आगे बढ़ने के लिए ऐसा कर रहे हैं। पुरानी भजन-कीर्तन की परंपरा को नया रंग देने की कला भजन क्लबिंग है।
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कहां होती है भजन क्लबिंग?
महानगरों की युवा आबादी तेजी से भजन क्लबिंग की ओर आगे बढ़ रही है। मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, दिल्ली, पुणे जैसे बड़े शहरों के युवा अब इसे अपना रहे हैं। पहले घर-मोहल्ले में भजन संध्या होती थी,हारमोनियम, ढोलक, तबला बजता था और सब मिलकर भजन गाते थे। अब युवा म्यूजिशियन और इवेंट ऑर्गनाइजर इसे आधुनिक रंग में रंग रहे हैं।
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भजन क्लबिंग काम कैसे करती है?
अब लोग पुराने भजनों को नए अंदाज में गा रहे हैं। बीट्स, इलेक्ट्रिक गिटार, डीजे मिक्स जोड़कर बेहतर संगीत तैयार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह तेजी से पॉपुलर हो रहा है। लोग इन कंसर्ट में इंस्टाग्राम, यूट्यूब के लिए खूब वीडियो बना रहे हैं। युवाओं की नाचती, डांस करती तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं। गली-कूचे से निकलकर ओपन, कूल क्लब कल्चर बन गया है।
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भजन क्लबिंग पर युवा क्या सोचते हैं?
अनिकेत राइकवार, दिल्ली, जेन जी एक्टिविस्ट:-
भजन क्लबिंग का मतलब धर्म का प्रचार करना नहीं, बल्कि तनाव भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर अपनी जड़ों की ओर लौटना है। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी अपनी परंपराओं को छोड़ी नहीं रही, बल्कि उन्हें अपने अंदाज में ढाल रही है।
जनरेशन Z को क्यों पसंद आ रहा है?
युवाओं का एक बड़ा हिस्सा अब धार्मिक दिखना चाहता है। धर्म नया कूल फैशन है। नाइटलाइफ और क्लब के कल्चर से ऊबे लोग, अब इस तरह की क्लबिंग कर रहे हैं। लोग ग्रुप में गाते हैं, हंसते हैं, नाचते हैं। इसे युवा सेल्फ केयर का जरिया मानते हैं। इस तरह के कंसर्ट में कोई अल्कोहल, ड्रग्स नहीं चाय, छाछ, पारंपरिक स्नैक्स मिलते हैं। लड़के-लड़कियां सबके लिए सुरक्षित माहौल होता है। लोग छोटे कपड़ों या वेस्टर्न ड्रेस की जगह कुर्ता, साड़ी और पारंपरिक कपड़ों में नजर आते हैं। डिस्को लाइट की जगह मोमबत्तियां, अगरबत्ती, गेंदे के फूल और झालर का इस्तेमाल होता है।