अमेरिका ने भारतीय एक्सपोर्ट पर लगने वाले 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 10 फीसदी कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसका एलान किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की यह दावा किया कि भारत, रूस से तेल नहीं खरीदेगा। भारत की औपचारिक प्रतिक्रिया इस ट्रेड डील पर नहीं आई है। रूस, भारत का दशकों पुराना साझेदार है, जिसके साथ भारत बेहतर रिश्तों में भरोसा करता है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने भारत के साथ एक व्यापार समझौता किया है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और कहा कि भारत अब रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। बदले में, अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर तुरंत 18 फीसदी कर रहा है। 

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ट्रंप के एलान से क्या बदलने वाला है?

पहले अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी 'रिसिप्रोकल' टैरिफ लगाया हुआ था और रूसी तेल खरीदने की वजह से अगस्त में अतिरिक्त 25 फीसदी पेनल्टी टैरिफ भी लगा दिया था। ट्रंप के इस फैसले के बाद कुल टैरिफ 50 फीसदी से ज्यादा हो गया था। अब पेनल्टी टैरिफ पूरी तरह से हटा लिया गया है। बाकी टैरिफ 18 फीसदी ही रह जाएगा। भारतीय सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां, कपड़े, केमिकल और ज्वेलरी अमेरिका में सस्ते हो जाएंगे।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया है कि भारत रूसी तेल की जगह अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा। भारत रोजाना लगभग 15 लाख बैरल रूसी तेल खरीदता है, जो उसके कुल तेल आयात का एक तिहाई से ज्यादा है। रूसी तेल सस्ता होने की वजह से भारत इसे खरीदता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अब तेल की कीमतें कम होने और अमेरिकी टैरिफ के दबाव से भारत अब तेल खरीदारी अमेरिका से करेगा।

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अमेरिकी एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला का तेल रूसी तेल की तरह ही है, जो भारत की रिफाइनरियों के लिए बेहतर है। अभी वेनेजुएला की तेल उत्पादन क्षमता बहुत कम है और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है। इसे पहले जैसी 30 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता तक लाने में 10 साल और अरबों डॉलर लग सकते हैं। भारत रूस से वेनेजुएला की तुलना में कहीं ज्यादा तेल खरीदता है, इसलिए पूरा बदलाव आसान नहीं होगा और इसमें समय लगेगा।

क्यों मजबूर हुए हैं डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिकी सामानों पर टैरिफ को शून्य करेगा और गैर-टैरिफ बैरियर्स भी हटाएगा। इसके तहत टैक्स के विशेष नियमों को हटाया जाएगा, जो अब तक अमेरिकी व्यापार पर लगे हुए थे। भारत अमेरिकी ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि, कोयला आदि में 500 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करेगा। अमेरिकी सामान ज्यादा खरीदेगा। यह समझौता इसलिए जल्दी हुआ क्योंकि यूरोपीय संघ ने पिछले हफ्ते भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो सकता था। 

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डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
आज सुबह भारत के पीएम मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। वह मेरे सबसे अच्छे मित्रों में से एक हैं और अपने देश के एक शक्तिशाली और सम्मानित नेता हैं। हमने कई विषयों पर चर्चा की, जिनमें व्यापार और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना भी शामिल था। उन्होंने रूसी तेल की खरीद बंद करने, अमेरिका से और संभवतः वेनेजुएला से, कहीं अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई।

अमेरिका और भारत का व्यापार सौदा कितना है?

अमेरिका और भारत के बीच व्यापार अब तक ट्रैक पर था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों की वजह से दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए थे। साल 2025 में अमेरिका ने भारत से 95.5 अरब डॉलर का सामान आयात किया था और 42 अरब डॉलर का निर्यात किया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:-
आज अपने प्यारे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। खुशी है कि अब मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 18% कम हो जाएगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की तरफ से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद। जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और आपसी फायदे वाले सहयोग के लिए बहुत सारे मौके खुलते हैं। वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व बहुत जरूरी है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। मैं अपनी पार्टनरशिप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।

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क्या भारत, रूस से व्यापारिक संबंध तोड़ लेगा?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डील के शर्तें थोड़ी अस्पष्ट हैं और भारत पूरी तरह रूसी तेल बंद कर पाएगा या नहीं, यह देखना बाकी है। भारत पहले भी प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल खरीदता रहा है। अब कम तेल कीमतों और टैरिफ राहत से हो सकता है कि भारत कोई बड़ा फैसला ले। अगर ऐसा हुआ तो यह डील रूस की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है। 

एस जयशंकर, विदेश मंत्री:-
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत के बाद द्विपक्षीय व्यापार पर हुई घोषणाओं का स्वागत है। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में ज्यादा नौकरियाँ पैदा होंगी, विकास को बढ़ावा मिलेगा और इनोवेशन बढ़ेगा। यह 'मेक इन इंडिया' की कोशिशों को मज़बूत करेगा और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी संबंधों को बढ़ावा देगा। हमारे आर्थिक सहयोग में मौके सच में बहुत ज़्यादा हैं और हमें उन्हें हासिल करने का पूरा भरोसा है। एक मजबूत आर्थिक रिश्ता हमारी रणनीतिक साझेदारी के लिए सबसे मजबूत नींव है।

भारत की अब तक की नीति क्या रही है?

भारत की व्यापारिक नीति स्वतंत्र है। भारत किसी दबाव में अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करता है। विदेश मंत्रालय की ओर से यह कई बार कहा जा चुका है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर भारतीय अधिकारियों की कोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।