सनी देओल और वरुण धवन की फिल्म बॉर्डर-2 सुर्खियों में है। फिल्म खूब पैसे कमा रही है। इसे बनकर तैयार होने में लगभग 275 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वरुण धवन, अहान शेट्टी, दिलजीत दोसांझ और सोनम बाजवा जैसे सितारों से सजी ये फिल्म साल 1971 के जंग पर बनी है, जब पाकिस्तान ने कई मोर्चे पर देश पर हमला बोला था। क्या आपको पता है कि जितनी में बॉर्डर फिल्म बनकर तैयार हुई है, उससे 78 करोड़ रुपये कम में साल 1947 में देश का बजट पेश हुआ था।
1 फरवरी 2026 को अपना यूनियन बजट 2026-27 पेश करने की तैयारी में है। यह बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसद में पेश करेंगी। लगातार नौवीं बार है, जब वह बजट पेश कर रहीं हैं। संसद का बजट सत्र चल रहा है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए 'विकसित भारत' का विजन बताया है। क्या आपको अपने देश के पहले बजट के बारे में पता है?
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कैसा था देश का पहला बजट?
स्वतंत्र भारत का पहला बजट आजादी के तीन महीने बाद 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। तब देश में कोई चुनी हुई संसद नहीं थी, बल्कि संविधान सभा ही विधायी शक्ति ही काम कर रही थी। पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने यह बजट पेश किया। देश विभाजन की त्रासदी, हिंसा, विस्थापन और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा था। यह बजट सिर्फ 7.5 महीने, 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 के लिए बनाया गया था।
देश के पहले बजट में कुल राजस्व 171.5 करोड़ रुपये अनुमानित था, जबकि खर्च 197 करोड़ रुपये। राजकोषीय घाटा करीब 26 करोड़ रुपये था। बजट का 47 फीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च हुआ था। भारत के सामने सीमाई सुरक्षा बड़ी थी। बाकी पैसा विभाजन से प्रभावित लोगों की मदद, पुनर्वास और खाद्यान्न आत्मनिर्भरता पर लगाया गया।
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किस पर था पहले बजट का फोकस?
भारत और पाकिस्तान ने सितंबर 1948 तक एक ही मुद्रा इस्तेमाल करने का फैसला किया था। उस समय ब्रिटिश राज की वजह से अर्थव्यवस्था कमजोर थी। भारी टैक्स और द्वितीय विश्व युद्ध के असर से देश आर्थिक रूप से टूटा हुआ था। शुरुआती बजटों का फोकस पुनर्निर्माण, स्थिरता, कृषि, उद्योग और शिक्षा पर था। वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी के बाद जॉन मथाई ने 1949-50 और 1950-51 के बजट पेश किए, जिसमें सभी रियासतें शामिल थीं।
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बजट, तब से लेकर अब तक क्या बदला
समय के साथ बजट प्रक्रिया बदली, लेकिन गोपनीयता आज भी बरकरार है। बजट के आंकड़े लीक होने पर सख्त कार्रवाई होती है। 'ब्लू शीट' सिर्फ संयुक्त सचिव (बजट) ही संभालते हैं। पहले बजट दस्तावेज राष्ट्रपति भवन में छपते थे, बाद में मिंटो रोड और अब नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में छपने लगे। 'हलवा सेरेमनी' से बजट की तैयारियां शुरू होती हैं और अधिकारी'लॉक इन' हो जाते हैं। वित्त मंत्री भी मोबाइल नहीं ले जा सकते। साल 1947 के सात महीने के छोटे बजट से देश के बजट की शुरुआत हुई थी, आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था है।
