इजरायल को लेकर दुनिया दो धड़े में बंट चुकी है। एक वर्ग है जो इजरायल को पसंद करता है लेकिन सुधार चाहता है, दूसरा वर्ग है जो इजरायल से नफरत करता है। दो धुरी में बंटी दुनिया में एक चेहरे की चर्चा खूब हो रही है। वह चेहरा कोई और नहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं। पश्चिमी दुनिया के अखबार उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं।
ब्रिटेन के अखबार 'द टेलीग्राफ' ने बेंजामिन नेतन्याहू को युग का महान नेता बता दिया है। नेतन्याहू के बारे में कंजर्वेटिव पत्रकार चार्ल्स मूर ने ऐसा कुछ लिखा है, जिसे सुनकर लोग हैरान हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को विंस्टन चर्चिल जैसा बताया गया है।
विंस्टन चर्चिल, इंग्लैंड के प्रधानमंत्री रहे हैं। जब दुनिया साल 1940 से 1945 के बीच जंग से जूझ रही थी, तब उनकी खूब चर्चा होने लगी। उनकी कूटनीति और रणनीतियों की आज भी चर्चा होती है। वह तब के इकलौते प्रधानमंत्री थे, जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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कहां नेतन्याहू की तारीफ हो रही है?
चार्ल्स मूर का मानना है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने दशकों से ईरान को खतरा मानकर उस पर नजर रखी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गठजोड़ किया और हमास, हिजबुल्लाह और तेहरान के खिलाफ सैन्य सफलताएं हासिल कीं। बेंजामिन नेतन्याहू की वजह से मध्य पूर्व अब पूरी तरह बदल गया है।
खुद को चर्चिल मानने लगे हैं नेतन्याहू?
नेतन्याहू खुद को आधुनिक चर्चिल मानते हैं। उनका तर्क है कि ईरान के खिलाफ वह दुनिया की रक्षा कर रहे हैं, जैसे चर्चिल ने नाजी जर्मनी के खिलाफ किया था। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को मारा जा चुका है। ईरान के खिलाफ जंग में नेतन्याहू को शुरुआती सफलता मिली है, इस वजह से उनकी तारीफ भी हो रही है।
क्या चुनाव जीतने के लिए युद्ध लड़ रहे नेतन्याहू?
इजरायल में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। इस युद्ध का फायदा उठाने की कोशिश चल रही है। इजरायल इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज (INSS) की रिपोर्ट बताती है कि 81 फीसदी इजरायली लोग ईरान पर हमलों का समर्थन करते हैं और 63 फीसदी लोग चाहते हैं कि अभियान तब तक चले जब तक ईरान का शासन खत्म न हो जाए।
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घर में विरोधियों को भी साध ले गए नेतन्याहू
इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू के धुर विरोधी नेता यायर लैपिड और नफ्ताली बेनेट भी अब सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं। नेतन्याहू ने हमेशा ईरान को इजरायल के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन अब वह सैन्य अभियानों से अपनी छवि सुधारने में लगे हैं।
इजरायल को क्या हासिल हुआ?
इजरायल ने हमास, हिजबुल्लाह और अब ईरान के प्रमुख नेताओं को मार गिराया है। इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन रोअरिंग लायन' नाम दिया गया है। इसका मतलब है दहाड़ता हुआ शेर। उनका यही नारा, अब चुनावी मैदान में भी उनकी मदद कर सकता है, यह उनके लिए ब्रांडिंग स्लोगन भी बन सकता है।
ट्रंप की भी हो रही है तारीफ
डोनाल्ड ट्रंप भी इस जंग का हीरो खुद को मान रहे हैं। बेंजामिन नेतन्याहू हर बयान में अमेरिका और ट्रंप का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। वह ट्रंप को इजरायल का सर्वोच्च पुरस्कार देने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिका जंग पर क्या सोच रहा है?
अमेरिका में यह युद्ध विवादास्पद है। एक CNN ने एक पोल कराया था, जिसमें पोल में 60 फीसदी अमेरिकी लोग अमेरिका के ईरान पर हमले के खिलाफ हैं। डेमोक्रेट्स में सिर्फ 18 फीसदी लोग जंग को समर्थन दे रहे हैं, वहीं 77 फीसदी रिपब्लिकन जंग को समर्थन दे रहे है।
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने दावा किया था, 'अमेरिका ने यह ऑपरेशन इसलिए शुरू किया था क्योंकि हमें पता था कि इजरायली एक्शन होने वाला है, जिससे ईरानी सरकार इस इलाके में अमेरिकी सेना पर हमला कर देगी।'
मार्को रुबियो के इस बयान को लोगों ने समझा कि इजरायल ने अमेरिका को हमला करने के लिए मजबूर किया। मार्को रुबियो को महज 24 घंटें में अपना बयान बदलना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का था। डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में यहां तक कह दिया, 'असल में हो सकता है मैंने उन पर दबाव डाला हो।'
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अब आगे क्या?
इजरायल-अमेरिका संबंधों में खटास आ सकती है। अमेरिका में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन इस जग में बंटे हुए हैं। समर्थन कम हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप, खुद इस जगं का समाधान चाह रहे हैं लेकिन अब ईरान हिंसक कार्रवाई कर रहा है। युद्ध कब खत्म होगा, यह सवाल बड़ा है। बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के शासन को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं। अगर ट्रंप जल्दी जीत घोषित कर दें, तो इजरायल के लक्ष्य अधूरे रह सकते हैं। इससे इजरायल को अमेरिका में और आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों इजरायल, नाजुक मोड़ पर है?
इजरायल की स्थापना में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी। ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने इजरायल और अमेरिका के बीच के पुराने और मजबूत रिश्तों को एक कठिन मोड़ पर खड़ा कर दिया है। इजरायल अब अमेरिका की आंतरिक राजनीति का हिस्सा बन गया है, जो उसके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इजरायल, अमेरिकी राजनीति में कैसे उलझा?
आमतौर पर अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियां, इजरायल का समर्थन करती रही हैं। अब यह युद्ध द्विदलीय बहस का मुद्दा बन गया है। पूर्व इजरायली राजनयिक जेरेमी इसाचारोफ ने दावा किया है कि जब इजरायल अमेरिका की आंतरिक राजनीति का विषय बनता है, तो यह इजरायल के लिए हमेशा बुरा होता है।
आम जनता का नफरत बढ़ा क्यों?
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग की वजह से अमेरिका में आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में महंगाई बढ़ रही हैं। गैस और पेट्रोलियम की कीमतें बढ़ रही हैं। पेट्रोल की कीमतें, 3.12 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गईं हैं। अमेरिका का शेयर बाजार गिर रहा है और तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं। अमेरिकी अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह युद्ध अमेरिका की जरूरत है या सिर्फ अपने सहयोगी की खातिर वे इसे झेल रहे हैं।
क्यों अमेरिका की नजर में विलेन हो सकते हैं नेतन्याहू?
बेंजामिन नेतन्याहू को इस युद्ध का सूत्रधार माना जा रहा है। उन पर आरोप है कि वह लंबे समय से अमेरिका को मध्य पूर्व में युद्ध के लिए उकसाते रहे हैं। साल 2002 में इराक युद्ध के समय भी ऐसा ही हुआ था। अब डर यह है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा तो अमेरिकी जनता नेतन्याहू को ही इस आर्थिक और सैन्य संकट का मुख्य कारण मानने लगेगी।
जब जून 2025 में 12 दिनों तक इजरायल और ईरान के बीच जंग छिड़ी थी तो इजरायल और अमेरिका दोनों को लौटना पड़ा था। उस जंग में ईरान, संयुक्त रूप से दोनों देशों पर भारी पड़ा था। ईरानी हमले के निशान इजरायल की राजधानी येरुशलम तक नजर आए थे।
अब बेंजामिन नेतन्याहू का लक्ष्य ईरान की सत्ता को खत्म करना है, लेकिन ट्रंप का जोर जीत के एलान पर ही रहता है। अगर ट्रंप इजरायल के लक्ष्य पूरे होने से पहले ही युद्ध रोकते हैं तो तनाव बढ़ सकता है। इस स्थिति में भी दुनिया उन्हें ही विलेन मानेगी।
क्या हैं भविष्य की चिंताएं?
इजरायल के लिए सबसे बड़ी संपत्ति अमेरिका का बिना शर्त समर्थन रहा है। अब नेतन्याहू अपनी घरेलू राजनीति और सत्ता बचाने के चक्कर में अमेरिका का द्विदलीय समर्थन खो सकते हैं। दशकों से इजरायल की सुरक्षा की यही नींव रहा है। इजरायल हर तरफ मुस्लिम देशों से घिरा है, जिनके साथ उनके टकराव का इतिहास दशकों पुराना है।
