इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग, दुनिया के मुसीबत बनकर आ रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ईरान ने रोक दी है, जिसकी वजह से कई देशों में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है। ईरान के साथ जारी जंग अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की बजाय बड़े देश, अमेरिकी नीति से दूरी बना रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप, कई देशों को अपने टैरिफ से नाराज कर चुके हैं, ऐसे में उनके साथ किसी की भी हमदर्दी नहीं है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर NATO के सदस्य देश होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने में अमेरिका की मदद नहीं करते हैं तो संगठन का भविष्य बहुत बुरा हो सकता है। 

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NATO को क्यों धमकाने लगे ट्रंप?

ईरान ने जंग शुरू होने के बाद से ही इजरायल और अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। अब वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। अचानक तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ने लगीं हैं। अब कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। 

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
यह ठीक है कि जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मुनाफा हासिल करते हैं, वे इसे सुरक्षित रखने में मदद करें। अगर कोई जवाब नहीं आता या नकारात्मक जवाब आता है तो NATO का भविष्य बहुत बुरा होगा। अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए, नहीं तो NATO एकतरफा सड़क बन जाएगा। 

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डोनाल्ड ट्रंप की यह धमकी NATO के भीतर तनाव बढ़ा रही है। संगठन का मकसद सदस्य देशों की रक्षा करना है, न कि किसी सदस्य की ओर से छेड़ी गई जंग में उस देश की मदद करना। अमेरिका की मदद करने से NATO के देश इसी वजह से कतरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों जंगी जहाज भेजे जाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई भेजने को तैयार नहीं है। अब फारस की खाड़ी में अमेरिका कमजोर पड़ रहा है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI

NATO का क्या बिगाड़ सकते हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति से नई मुसीबत की आहट सुनाई दे रही है। NATO सहयोगी इस दबाव को NATO की एकता के लिए खतरा मान रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की मदद का हवाला देते हुए कहा कि अब सहयोगियों को अमेरिका की मदद करनी चाहिए। अगर NATO में फूट पड़ती है तो अमेरिका के लिए भी यह जोखिम है। 

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इजरायल के लिए जंग लड़ रहा अमेरिका?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य लक्ष्य समान हैं। इजरायल ने कहा है कि उसकी कार्रवाई कम से कम तीन सप्ताह और जारी रहेगी। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि युद्ध कुछ हफ्तों में समाप्त हो सकता है। ईरान ने 700 मिसाइल और 3,600 ड्रोन हमलों का दावा किया है। अब इस जंग पर अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप का विरोध हो रहा है। 

 

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। Photo Credit: IDF

चीन को क्यों धमकाने लगे हैं ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप, अब चीन पर दबाव बढ़ाने लगे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से सीधे अपील की कि वह होर्मुज स्ट्रेट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी 90 प्रतिशत तेल इसी राह से हासिल करता है। उन्होंने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं, अगर चीन अपना रुख साफ नहीं करता है।

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
चीन को भी मदद करनी चाहिए। हम स्थिति जानना चाहते हैं, क्योंकि दो सप्ताह लंबा समय है। हम इसे टाल सकते हैं।
 

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अलग पड़ गए हैं डोनाल्ड ट्रंप?

ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर तटस्थ रुख अभी तक अपनाया है। अमेरिका की मदद करने के लिए कोई तैयार नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से भी अपील की है कि वह इस संकट में सहयोग करे, क्योंकि चीन अपनी तेल की जरूरतों के लिए इस रूट पर निर्भर है। डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जिन देशों को लाभ मिलता है, उन्हें अमेरिका की मदद करनी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया है कि ब्रिटेन ने तुरंत मदद नहीं की।


NATO देश भी अमेरिका की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। Photo Credit PTI



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नया खतरा क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप का जैसा रुख है, कोई देश उनकी मदद करने के लिए तैयार नहीं है। वह खीजकर एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं, आर्थिक प्रतिबंध बढ़ा सकते हैं, जिसकी वजह से अमेरिका पर निर्भर देशों में आर्थिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही पश्चिम एशिया को जंग के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

खाड़ी के देशों को ईरान तबाह कर रहा है, इजरायल की राजधानी येरुशलम में बम मार रहा है, खाड़ी के तेल ठिकानों को निशाना बना रहा है। कुवैत पर भी ईरान की टेढ़ी नजर है। अगर यह जंग कुछ दिन और चली तो भारत जैसे देश में भी पेट्रोलियम संकट पैदा हो सकता है।