'ईरान जलाने चले थे ट्रंप, खुद झुलसे...', अमेरिका से चूक कहां हुई? इनसाइड स्टोरी
पश्चिम एशिया में छिड़े जंग की वजह से दो सप्ताह में कम से कम 10 देशों में तबाही मची है। डोनाल्ड ट्रंप जिस मकसद से जंग में कूदे थे, वह बुरी तरह नाकाम रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात में ईरान लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। Photo Credit: PTI
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए। अमेरिका और इजरायल का मानना था कि इससे ईरान की सरकार कमजोर हो जाएगी और कोई अमेरिका के इशारों पर नाचने वाला नेता आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
हमले के बाद ईरान ने और ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। ईरान ने नए सुप्रीम लीडर के रूप में अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को चुना। वह अपने पिता से कहीं ज्यादा कट्टर और सख्त हैं। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से मध्य पूर्व में कई जगहों पर हमले किए। अमेरिका के ज्यादातर सैन्य बेस या तो तबाह हो चुके हैं, या उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचा है। तेल टैंकरों पर ईरान भीषण हमले कर रहा है, आरामको जैसे तेल प्लांट तक प्रभावित हो चुके हैं।
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ईरान की रहम पर दुनिया के कई देश
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकर और व्यापारिक जहाजों को अब गुजरने नहीं दे रहा है। पूरी दुनिया, अब ईरान की रहम पर निर्भर है। होर्मुज से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है, वहां अब ईरान का पूरा नियंत्रण है। दुनिया में तेल की कीमतें बहुत बढ़ गईं है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में गैस संकट पैदा हो रहा है।
2 दिन में ईरान का सरेंडर चाहते थे ट्रंप, खुद सरेंडर मोड में
अमेरिका को उम्मीद थी कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब यह खुला युद्ध बन गया है। अमेरिकी सेना को ज्यादा नुकसान हुआ है। 13 सैनिक मारे गए और 140 घायल हुए हैं। अमेरिका में जनता युद्ध के खिलाफ है और गैस की कीमतें बढ़ने से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई और उनके सहयोगियों की जानकारी देने पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया है लेकिन वह बुरी तरह फंस गए हैं। अमेरिका, इस जंग का मकसद ही साबित नहीं कर पाएगा। अब वह फ्रांस और जापान जैसे देशों से मदद के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
कई देश, खासकर वे जो ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर, इस स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे। हमने ईरान की 100 फीसदी सैन्य क्षमता को पहले ही नष्ट कर दिया है। उनके लिए एक-दो ड्रोन भेजना, कोई माइन गिराना या इस स्ट्रेट के आस-पास या इसके अंदर कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, भले ही वे कितनी भी बुरी तरह से हार गए हों। उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस परेशानी से जूझ रहे हैं, इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजेंगे, जिससे होर्मुज में अब उस देश की ओर से कोई खतरा न रहे, जिसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
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ईरान को कम आंक गए बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप प्रशासन ने खुफिया जानकारी के आधार पर जल्दी हमला किया, जिससे ईरान के सभी बड़े नेता एक साथ मारे जाएं। लेकिन हमले इतने बड़े थे कि जिन लोगों को अमेरिका ईरान का नया लीडर बनाने की उम्मीद कर रहा था, वे भी मारे गए। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना कि जिन्हें हम चाहते थे, वे मर गए। अब नए लीडर मोजतबा खामेनेई हैं, जो बदला लेने की बात कर रहे हैं। वह खून का बदला खून से ही चाहते हैं।
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ईरान की ताकत कैसे नहीं समझ सके ट्रंप
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। अमेरिका दावा करता रहा कि आप लोग रिस्क पर अपने जहाज को ले जाइए, अमेरिकी जहाज रेस्क्यू करेंगे। सच यह है कि अमेरिका खुद जहाज उतरने से डर रहा हैं। अमेरिका के कई जहाज ईरान ने मार गिराए हैं। दुनिया का 20 फीसदी तेल जहां से गुजरता है, वहीं ईरान अपने सबसे हिंसक रूप में है।
ईरान ने तेल टैंकरों पर हमले किए, कई टैंकर जले। अमेरिका ने भी जोर आजमाइश की। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। अमेरिका में पेट्रोल 3.63 डॉलर प्रति गैलन हो गया।
अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर बमबारी की, जो ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र है। अमेरिका के हमलों से ईरान और सख्त हो गया है। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मुश्किल है। नौसेना से जहाजों की सुरक्षा की बात चल रही है, लेकिन अमेरिका फारस की खाड़ी में फिसड्डी साबित हुआ है।
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ईरान नहीं, अमेरिका करेगा सरेंडर?
डोनाल्ड ट्रंप हारकर भी अपनी जीत की दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि जंग जल्द खत्म हो जाएगी, लेकिन उनके मंत्री यह बात मानने को तैयार नहीं है। मार्को रुबियो और पीट हेगसेथ ने बार-बार कहा है कि जंग खत्म होने में 4-6 हफ्ते लग सकते हैं।
अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स पहले से नाराज हैं। डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक सांसद भी नाराज हैं क्योंकि कोई साफ योजना नहीं दिख रही है। अमेरिका के पास ईरान की ऐसी दुविधापूर्ण नीति, पहले की किसी भी सरकार में नहीं रही। अमेरिका के सहयोगी देश जैसे जर्मनी और कतर चिंतित हैं। क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों को निकालने की नौबत आ गई है। ईरान ने पड़ोसी देशों पर लगातार हमले किए हैं।
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अब आगे क्या रास्ता है?
डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका:-
अमेरिका समुद्र तट पर जोरदार बमबारी करेगा। लगातार ईरानी नावों और जहाजों को पानी में ही तबाह करता रहेगा। किसी भी तरह से, हम जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और मुक्त करवा लेंगे।
अमेरिका, ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल, नौसेना और न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना चाहता है। ईरान मजबूती से टिका हुआ है। युद्ध लंबा खिंच सकता है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के लिए कोई साफ नीति नहीं है। वह खुद कह रहे हैं कि जब तक मुझे लगेगा, जंग जारी रहेगा। उनके इस रवैये से पड़ोसी और सहयोगी देश फंसे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की वजह से पश्चिम एशिया जल रहा है और आग की लपटें में खुद अमेरिका जल रहा है।
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