ईरान में विरोध प्रदर्शन और तेज होते जा रहे हैं। गिरती करंसी को लेकर शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब देशभर में हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों को लेकर अब अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव बढ़ गया है और दोनों देश एक-दूसरे को धमकियां दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनों पर पोस्ट की थी, जिसके बाद ईरानी नेताओं ने भी धमकी दे डाली है।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का शनिवार को छठा दिन है। ईरान में पिछले रविवार को तब प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जब राजधानी तेहरान में कुछ दुकानदार गिरती करंसी को लेकर सड़कों पर उतर आए थे। धीरे-धीरे ये विरोध प्रदर्शन देशभर में फैल गए और अब इन प्रदर्शनों में महिलाएं भी शामिल हो गईं हैं।
ये विरोध प्रदर्शन सरकार के खिलाफ हो रहे हैं। सड़कों पर उतरे लोग ईरान की सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबल आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों को दबाने पर ही ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी।
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ट्रंप की पोस्ट और ईरान की धमकी
अमेरिका और ईरान के बीच धमकियों का ये सिलसिला ट्रंप की एक पोस्ट से शुरू हुआ। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। ट्रंप ने लिखा था कि 'हम तैयार हैं।'

इसके बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका इन प्रदर्शनों को भड़का रहे हैं।
अली लारीजानी ने ट्रंप की पोस्ट को शेयर करते हुए X पर लिखा, 'इजरायली अधिकारियों और ट्रंप के बयानों से वे बेनकाब हो गए हैं। हम विरोध करने वाले लोगों के रुख और अराजकता फैलाने वाले लोगों की हरकतों के बीच फर्क करते हैं और ट्रंप को यह पता होना चाहिए कि इस अंदरूनी मामले में अमेरिका का दखल पूरे इलाके को अस्थिर कर देगा और अमेरिका के हितों को ही नुकसान पहुंचाएगा।'
उन्होंने आगे लिखा, 'अमेरिकी लोगों को यह पता होना चाहिए कि ट्रंप ने यह सब शुरू किया है। उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।'
शुक्रवार रात को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को लिखी चिट्ठी में ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा, 'इन धमकियों और किसी भी संभावित तनाव बढ़ने से होने वाले किसी भी अंजाम के लिए अमेरिका पूरी तरह से जिम्मेदार होगा।'
सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के एडवाइजर अली शामखानी ने चेतावनी देते हुए कहा, 'ईरान की सुरक्षा में दखल देने वाले हाथ को काट दिया जाएगा।'
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क्या और बढ़ जाएगा तनाव?
ईरान में 2022 के बाद अब बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। ईरान पहले से ही इन प्रदर्शनों के लिए 'बाहरी ताकतों' को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों को सीधे तौर पर समर्थन दिया है। पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति इससे बचते रहे हैं। 2009 में जब ईरान में ग्रीन मूवमेंट हुआ था, तब तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इन विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करने से खुद को रोक लिया था। हालांकि, 2022 में उन्होंने इसे 'एक गलती' बताया था।
मगर अब ट्रंप का समर्थन जोखिम भरा है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के एक एनालिस्ट नायसन रफाती ने कहा, 'विरोध प्रदर्शनों की वजह भले ही ईरानी सरकार की अपनी नीतियां हैं लेकिन वह ट्रंप के बयान को इस सबूत के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं कि इसके पीछे बाहरी ताकत हैं।'
उन्होंने कहा, 'लेकिन इससे अमेरिका भी ईरान की किसी हिंसक कार्रवाई को बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। इससे ईरान में अमेरिका वह कर सकता है जिसकी चेतावनी ट्रंप ने दी है।'
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ईरान के 22 प्रांतों में प्रदर्शन, 8 मौतें
ईरान में रविवार से विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। इन प्रदर्शनों में अब तक 8 लोगों के मारे जाने की खबर है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसी ने बताया कि ईरान के 31 में से 22 प्रांतों में 100 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी अब पाकिस्तान की सीमा से लगे ईरान के अशांत सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के जाहेदान में भी सड़कों पर भी उतर आए हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर मोहम्मद रेजा फर्जीन का इस्तीफा भी मंज़ूर कर लिया और उनकी जगह पूर्व वित्त मंत्री अब्दोलनासेर हेम्मती को नियुक्त किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि वह बहुत ज्यादा नहीं कर सकते।
कुछ सालों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरान की करंसी बहुत तेजी से गिरी है। अभी 1 डॉलर की तुलना में ईरानी करंसी का भाव 42,000 रियाल है। हालांकि, दुकानदारों का दावा है कि 1 डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल तक पहुंच गई है। गिरती करंसी के कारण ही ईरान में प्रदर्शन शुरू हुए थे, क्योंकि लोगों का कहना है कि उनका पैसा बर्बाद हो गया है।
