अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में स्थाई शांति स्थापित करने के लिए प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है और बोर्ड में शामिल होने की अपील की है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।
भारत और इजरायल के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। भारत फिलिस्तीन को भी मान्यता देने वाले देशों में शुमार है। डोनाल्ड ट्रंप, भारत की इसी स्थिति का लाभ लेना चाहते हैं। डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि मध्य-पूर्व में शांति लाने की कवायद में भारत भी सक्रिय भूमिका निभाए और इस कार्यक्रम में हिस्सा ले।
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ट्रंप की चिट्ठी में क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक लहजे में भारत की तारीफ करते हुए न्योता दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मध्य पूर्व में शांति को मजबूत करने और वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए मैं आपको आमंत्रित कर रहा हूं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस बताया कि गाजा पर उनके 20-सूत्रीय योजना का एक अहम हिस्सा, गाजा पीस बोर्ड है, जो गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए बनाई गई है। बोर्ड को उन्होंने सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक दुनियाभर के बड़े देश इस पहल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।ऑ
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'बोर्ड ऑफ पीस' क्या काम करेगा?
'बोर्ड ऑफ पीस' इजरायल-हमास युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण का प्रमुख हिस्सा है। यह बोर्ड गाजा में प्रशासन की निगरानी करेगा। गाजा खंडहर में तब्दील शहर बन गया है, जिसके पुनर्निर्माण, स्थिरता, विकास और प्रभावी शासन के लिए यह बोर्ड करेगा। ट्रंप इसे न केवल गाजा तक सीमित रखना चाहते हैं, बल्कि वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक नया मंच बनाने की योजना है। बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप खुद करेंगे।
किन देशों को न्योता मिला?
भारत के अलावा हंगरी, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, पाकिस्तान, जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस, कनाडा, तुर्की, मिस्र, पैराग्वे, अर्जेंटीना और अल्बानिया सहित कई देशों को यह न्योता दिया गया है। हंगरी और वियतनाम ने पहले ही आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। अन्य देशों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।
पीस बोर्ड में शामिल होना है? 1 अरब डॉलर जमा करो
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 1 अरब डॉलर का योगदान देने वाले देशों को बोर्ड में स्थायी सीट मिल सकती है। ऐसी अटकलें हैं कि डोनाल्ड ट्रंप, एक नया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसा संगठन बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधित्व हावी रहेगा। जो देश आर्थिक मदद नहीं देंगे, उन्हें 3 साल का कार्यकाल दिया जाएगा। व्हाइट हाउस ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि जो देश आर्थिक मदद देंगे, उनकी मदद से गाजा को फिर से आबाद किया जाएगा।
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भारत सरकार का रुख क्या है?
सरकार ने अभी तक इस न्योते पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। रूस से तेल व्यापार पर अमेरिका भड़का है। भारत व्यापारिक और क्षेत्रीय संप्रभुता में यकीन करने वाला देश है। अमेरिका को जवाब भारत दे चुका है।
अब चुनौती क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप, दुनिया के लिए संयुक्त राष्ट्र से इतर नई व्यवस्था चाहते हैं। वह गाजा पीस प्लान के दूसरे चरण के लिए नई नीति तैया कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर अब सवाल उट रहे हैं। भारत अगर इस कार्यक्रम में हिस्सा लेता है तो मध्य पूर्व की राजनीति में यह अहम कदम होगा।
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सर्जियो गोर ने क्या है?
भारत में अमेरिका के एम्बेसडर सर्जियो गोर ने कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोर्ड ऑफ पीस में हिस्सा लेने का न्योता देते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। गाजा में इस फैसले से शांति आएगी। बोर्ड स्थिरता और खुशहाली पाने के लिए मजबूत गवर्नेंस को सपोर्ट करेगा।'
