हम रोजर्मरा की जिंदगी में किस तरह का खाना खाते हैं और किस तरह के पर्यावरण में रहते हैं? इन दोनों चीजों का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। सांस और फेफड़ों की बीमारियां दुनियाभर में तेजी से बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतों का मुख्य कारण फेफड़ों का कैंसर है। पहले कहा जाता था कि जो लोग धूम्रपान करते हैं। उन्हें फेफड़ों का कैंसर होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि नॉन स्मोकर्स में फेफड़ों के कैंसर के मामले ज्यादा सामने आए हैं।

 

फेफड़ों में दो तरह के कैंसर पाए जाते हैं। एक नॉन स्मोकिंग सेल लंग कैंसर (NSCLC) और दूसरा स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC) है। नॉन स्मोकिंग सेल लंग कैंसर- यह बहुत आम है और ज्यादातर लोगों को फेफड़ों का यही कैंसर होता है। स्मॉल सेल लंग कैंसर रेयर होता है लेकिन बहुत तेजी से फैलता है। Lancet eClinical Medicine study की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फेफड़ों के कैंसर के मरीज की संख्या में 50% लोग नॉन स्मोकर्स थे। इन लोगों ने अपनी जिंदगी में कभी सिगरेट या अन्य कोई नशा किया था। यह रिपोर्ट साल 2024 में पब्लिश हुई थी।

 

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हर 9 में से 1 व्यक्ति फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित

भारत में हर 9 में से 1 पुरुष फेफड़ों के कैंसर का शिकार है। महिलाओं में भी हर 8 में से 1 महिला लंग कैंसर से पीड़ित है। भारत में हर साल 81,000 नए मामले सामने आते हैं और सलाना 75000 मौतें होती हैं। ये आंकड़े डराने वाले हैं। ज्यादातर लोगों को फेफड़ों के कैंसर के बारे में तीसरे या चौथे स्टेज में पता चलता है। इस वजह से सर्वाइवल रेट बहुत कम होता है।

नॉन स्मोकर्स को किन कारणों से होता है कैंसर?

पैसिव स्मोकिंग के कारण- फेफड़ों के कैंसर होने का मुख्य कारण धूम्रपान करना है लेकिन जो लोग सिगरेट नहीं पीते हैं। वे भी इससे बचे नहीं है। जो लोग कई सालों से लगातार धुएं के कॉन्टेक्ट में रहते हैं तो उन्हें सेकंड हैड स्मोकर्स कहा जाता है। ये लोग भी हानिकारक तत्वों के संपर्क में आते हैं। इस वजह से लंग कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

वेपिंग और ई सिगरेट्स भी पूरी तरह से हानिरहित नहीं माना जा सकता है। इनके एरोसोल में निकोटिन और अन्य रसायन के कण हो सकते हैं। फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे चीजों से दूरी बनाकर रखें।

 

 

प्रदूषण- फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होने का मुख्य कारण प्रदूषण है। हवा में मौजूद बारीक कण सांस के जरिए शरीर के अंदर जा सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक जब हवा की गुणवत्ता खराब हो तो प्रदूषण से बचने के लिए एन 95 मास्क जरूर लगाएं। वायु प्रदूषण को फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा माना गया है। 

 

घरेलू धुआं- खाना पकाने के दौरान चूल्हे या लकड़ी से निकलने वाला धुआं महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा फेफड़ों का कैंसर जेनेटिक भी हो सकता है।

 

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फेफड़ों के कैंसर के लक्षण

  • लगातार खांसी रहना
  • खून वाली खांसी
  • सांस लेने में तकलीफ
  • सीने में दर्द
  • लगातार थकान और कमजोरी
  • अचानक वजन घटना

बचाव का तरीका क्या है?

  • धूम्रपान छोड़ें
  • पैसिव स्मोकिंग से बचें
  • वायू प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनें।
  • हेल्दी डाइट लें
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • 6 महीने या सालभर पर हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं।