इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। ज्यादातर लोग गर्मी से बचने के लिए ऐसी का इस्तेमाल करते हैं। इस बार गर्मी इतनी ज्यादा पड़ रही है कि ऐसी वाले कमरे में भी लोगों को नींद नहीं ही आ रही हैं। नींद पूरी नहीं होने की वजह से सुबह में सिरदर्द होता और दिन भर थकान महसूस होती है।

 

डॉक्टरों ने यह भी चेतावनी दी है कि अस्थमा, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, एलर्जी संबंधी बीमारियों, हृदय संबंधी बीमारियों और डिहाइड्रेशन से पीड़ित लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ता है। गर्मी में अधिक तापमान के कारण हमारे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम प्रभावित होता है जिससे नींद आने में दिक्कत होती है। हमने इस बारे में दिल्ली, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के रेस्पिरेट्री मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर निखिल मोदी से बात की है।

 

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फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है?

डॉक्टर निखिल मोदी के मुताबिक, हीटवेव की वजह से सीधा सांस संबंधी बीमारियां नहीं होती है लेकिन इस वजह से डिहाइड्रेशन बहुत ज्यादा हो जाता है। हीटवेव के कारण तापमान अधिक होता है जिसकी वजह से शरीर में सूजन का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर से अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है। इस दौरान पसीना जरूरत से ज्यादा आता है जिस वजह से डिहाइड्रेशन होता है।

 

डिहाइड्रेशन की वजह से म्यूकस ड्राई हो जाता है। जब म्यूकस ड्राई होकर फेफड़ों में फंस जाता है तो इस वजह खांसी होना और एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है। ये सामान्य चीज होते ही हैं। हीट वेव की वजह से लोगों को सांस संबंधी कोई बीमारी नहीं होती है लेकिन इंफेक्शन खतरा ज्यादा होने से फफड़ों को नुकसान पहुंच जाता है।

 

 

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ऐसी वाले रूम में लगवाएं ह्यूमिडिफायर

ऐसी वाले कमरे की हवा में नमी कम होती है। इस वजह से ड्राई एयर फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हवा में नमी को बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें। National Library of Medicine  में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक तापमान नींद की गुणवत्ता पर असर डालता है। इस वजह से आपकी बार-बार नींद खुल सकती हैं। 

नींद को बेहतर करने के लिए क्या करें?

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • रात को सोने से पहले चाय-कॉफी न पिएं।
  • कमरे का तापमान का सामान्य रखें।
  • रात में भारी खाना खाने से बचें।
  • अपने स्लीप शेड्यूल को मेंटेन रखें।
  • कमरे में वेंटिलेशन को बनाएं रखें।