केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) 30 साल पहले खत्म किए गए सेना के रैंक बहाल करने पर विचार कर रहा है। निचले स्तर के जवानों के बीच लंबे समय से जारी प्रमोशन के ठहराव को खत्म करने और भारतीय सेना से रिटायर होने वाले पूर्व अग्निवीरों को फोर्स में शामिल करने के उद्देश्य से ये कदम उठाया जा रहा है। सीआरपीएफ महानिदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर उसे बल की सभी यूनिटों में भेजा है। संबंधित रैंक यानी सिपाही और हवलदार, इस बाबत 48 घंटे में अपने सुझाव हेडक्वार्टर को भेजेंगे।

 

बल की सभी यूनिटों में भेजे गए प्रस्ताव को सैनिक सम्मेलन, बैठकें और रोल कॉल आदि में जवानों के समक्ष रखा जाएगा। बता दें कि 'लांस' नायक और 'नायक' के रैंक का प्रचलन फिलहाल भारतीय सेना में है। करीब तीन दशक पहले सीआरपीएफ में भी ये रैंक होता था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी से 10 अक्टूबर 1997 को सीआरपीएफ से लांस नायक और नायक के पदों का सिपाही और हवलदार में विलय कर दिया गया था। हालांकि, सेना में ये दोनों रैंक अब भी हैं।

 

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पदोन्नति में देरी से टूटता है मनोबल

सीआरपीएफ में कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने वाले जवान को पांच साल में पहली पदोन्नति लांस नायक के पद पर मिलती है। इसके बाद 10 साल में नायक और फिर 20 साल में हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति मिलती है। एक ही रैंक पर लंबे समय तक बने रहने के कारण जवानों में रोष भी देखने को मिलता है। पदोन्नति में आए ठहराव के चलते सिपाही के पद से वीआरएस लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। मौजूदा समय में सिपाही को करीब 20 से 22 साल में पहली पदोन्नति यानी हवलदार का पद मिलता है। यह योजना अगर सिरे चढ़ती है तो कर्मियों की सेवा छोड़ने की दर काफी कम हो जाएगी। सेक्शन-स्तर पर कमांड और कंट्रोल को मजबूत होगा।

 

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बेहतर होगा तालमेल

इस कदम को केंद्र सरकार की उस नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत अग्निवीरों के पहले बैच का 4 साल का कार्यकाल इस साल पूरा हो रहा है। सेना से 4 साल की सेवा के बाद सीआरपीएफ में भर्ती होने वाले अग्निवीरों को वही रैंक स्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे उनका तालमेल बेहतर रहेगा।

 

गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण, ऊपरी आयु सीमा में 3 से 5 साल की छूट और फिजिकल टेस्ट से पूरी तरह छूट दी है। अग्निवीर वे अल्पकालिक सैन्य कर्मी हैं, जिन्हें केंद्र सरकार की 'अग्निपथ योजना' के तहत चार साल के लिए तीनों सेनाओं में भर्ती किया जाता है।