पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच चल रहा विवाद समाप्त हो चुका है। सीएम भगवंत मान को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से फ्रांस यात्रा की मंजूरी मिल गई है। पंजाब सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए वकीलों में शामिल एडिशनल एडवोकेट जनरल (एएजी) फेरी सोफत ने बताया कि न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका स्वीकार कर ली।
विदेश मंत्रालय ने 17 से 21 अक्टूबर तक अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार प्रदर्शनी सियाल पेरिस में भाग लेने के लिए अनुमति देने से इनकार किया था। राज्य सरकार ने केंद्र के इस रुख को मनमाना करार दिया था। इस यात्रा के दौरान सीएम मान एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले थे। इसमें मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भी शामिल होते।
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पंजाब सरकार ने उठाए थे सवाल
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सीएम मान की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई थी। साथ ही सीएम को आमंत्रण नहीं मिलने की बात कही थी, जबकि पंजाब सरकार ने राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार करने के फैसले पर सवाल उठाए। एएजी फेरी सोफत ने अदालत को बताया कि जब केंद्र से अनुमति मांगी थी, तब आमंत्रण पत्र आवेदन के साथ संलग्न किया गया था। सुरक्षा के मुद्दे पर भी समयानुसार आवेदन किया था।
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खतरे की जताई थी आशंका
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि पंजाब सरकार के पत्र में मुख्यमंत्री को खालिस्तानी संगठनों से खतरा होने की आशंका जताई गई थी। पत्र में गुरपतवंत सिंह का नाम भी लिया गया था। केंद्र सरकार ने अदालत में सफाई दी कि संभावित खतरे को देखते हुए ही सीएम मान को फ्रांस जाने की राजनीतिक मंजूरी नहीं दी गई। इस पर, पंजाब सरकार ने केंद्र की दलीलों का जवाब देते हुए कहा कि जब दूसरे देशों के प्रतिनिधि भारत आते हैं तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्र सरकार भूमिका निभाती है।
केंद्र फ्रांस के अधिकारियों से बातचीत कर सीएम की सुरक्षा के इंतजाम करवा सकता है। दलील में कहा गया कि सीएम पहले भी कई विदेश यात्राएं कर चुके हैं, ऐसे में फ्रांस यात्रा के मामले में अलग रवैया अपनाना उचित नहीं है। पंजाब सरकार ने इसे भेदभावपूर्ण नीति करार दिया।