केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को जनगणना (संशोधन) नियम- 2026 को अधिसूचित कर दिया है। केंद्र सरकार ने जनगणना नियम- 1990 में संशोधन करके गणनाकर्ताओं की श्रेणियों को बढ़ाया है। अब सरकारी और निजी स्कूल के कर्मचारी, बैंकों के क्लर्क और सार्वजनिक उपक्रम के अधिकारी भी गणनाकर्ता बन सकते हैं। सरकार ने जनगणना अधिनियम- 1948 की धारा 18(1) के तहत मिली शक्तियों के अंतर्गत जनगणना (संशोधन) नियम- 2026 को अधिसूचित किया है।
संशोधित नियमों के मुताबिक अब सरकारी, स्थानीय प्राधिकरण, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ समितियों या ट्रस्टों द्वारा संचालित संस्थानों के शिक्षकों को भी गणनाकर्ता के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
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इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, सोसायटियां और ट्रस्ट शामिल के क्लर्क या कोई अन्य अधिकारी भी गणनाकर्ता बन सकते हैं। वहीं राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को उपयुक्त व्यक्ति को गणनाकर्ता के तौर नियुक्त करने की इजाजत होगी। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है। अधिसूचना के तुरंत बाद ही नियम लागू भी हो गए हैं।
दो चरणों में होनी है जनगणना
जनगणना 2027 की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को हुई। यह देश की आठवीं जनगणना है। देशभर में पहली बार डिजिटल रूप में जनगणना की जा रही है। जनगणना दो चरणों में हो रही है। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर तक आवास, सुविधाओं और घरेलू संपत्ति से जुड़े डेटा को अपडेट किया गया। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इसमें जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवासन और प्रजनन संबंधी फैक्टर को शामिल किया जाएगा। जाति जनगणना भी इसी चरण में होगी।
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16 भाषाओं में एप और वेबसाइट भी लॉन्च
देश में पहली बार जनगणना का डिजिटलीकरण किया गया है। कोई भी नागरिक घर बैठे स्व-गणना का हिस्सा बन सकता है। लोग मोबाइल एप और पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। यह एप और वेबसाइट 16 भाषाओं में उपलब्ध है। केंद्र सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट जनगणना के लिए आवंटित किया है। जनगणना प्रक्रिया में 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 7,000 से अधिक उप-जिले शामिल होंगे।
