पंजाब-हरियाणा की सीमा पर स्थित खनौरी-डाटा सिंहवाला बॉर्डर एक बार फिर किसान आंदोलन का नया केंद्र बन गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की ओर से शुरू की गई करीब 228 किलोमीटर लंबी किसान बचाओ पदयात्रा को हरियाणा में एंट्री की अनुमति नहीं मिलने के बाद किसानों और प्रशासन के बीच टकराव हो गया है। किसान 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान पंचायत करना चाहते हैं लेकिन हरियाणा सरकार ने किसानों को राज्य में नहीं आने दिया। 

 

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में यह मार्च 16 अगस्त को डाटा सिंहवाला से शुरू किया गया। आयोजकों के मुताबिक 51 किसान पूरी 228 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगे, जबकि करीब 200 समर्थक और स्वयंसेवक भी उनके साथ रहेंगे। किसानों ने साफ किया है कि यात्रा शांतिपूर्ण और अनुशासित रहेगी।

 

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क्यों कर रहे पदयात्रा?

इस पदयात्रा के पीछे कई मुद्दे हैं लेकिन दो मांगें सबसे प्रमुख हैं। किसान संगठन प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को बाहर रखने की मांग कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि विदेशी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने से भारतीय किसानों पर कॉम्पिटिशन का दबाव बढ़ सकता है। दूसरी बड़ी मांग सभी फसलों की MSP पर कानूनी गारंटी है। किसान संगठन स्वामीनाथन आयोग की C2+50 प्रतिशत वाली गणना के आधार पर खरीद की कानूनी व्यवस्था चाहते हैं। इसके अलावा किसान और खेत मजदूरों के मुद्दे, कर्ज और पेंशन समेत अन्य लंबित मांगें भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

 

हरियाणा ने बॉर्डर क्यों सील किया?

किसानों के दिल्ली मार्च के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने खनौरी बॉर्डर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था कर दी। हरियाणा की तरफ कंक्रीट बैरिकेड, लोहे की बैरिकेडिंग, कंटीले तार, दंगा-रोधी वाहन और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बॉर्डर पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है। पंजाब और हरियाणा के बीच इस रास्ते से आने-जाने वाले यातायात को भी दूसरे रूट में डायवर्ट कर दिया गया। जींद पुलिस का कहना है कि किसानों के पास हरियाणा से होकर इस मार्च को निकालने की अनुमति नहीं है। इसी आधार पर उन्हें राज्य में प्रवेश से रोका जा रहा है। दूसरी ओर डल्लेवाल का आरोप है कि जब किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बजाय केवल पैदल और शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते हैं, तब भी सरकार उन्हें रोक रही है।

 

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बॉर्डर पर तनाव

बॉर्डर पर पैदा हुए गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन किसान अपनी पदयात्रा रोकने को तैयार नहीं हुए। किसान नेताओं का कहना है कि वे दिल्ली जाने के अपने कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेंगे। उनका तर्क है कि उनकी मांगें केंद्र सरकार से जुड़ी हैं और इसलिए वे केंद्रीय स्तर पर बातचीत चाहते हैं। फिलहाल यही गतिरोध विवाद का सबसे बड़ा कारण है। प्रशासन कानून-व्यवस्था और अनुमति का हवाला देकर मार्च रोकना चाहता है, जबकि किसान शांतिपूर्ण पैदल यात्रा के जरिए दिल्ली पहुंचने पर अड़े हैं। किसान रात में भी सड़क के किनारे डेरा जमाकर बैठे रहे और प्रशासन से यात्रा के लिए अनुमति की अपील करते रहे।