कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने कहा कि सरकार को यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के साथ ट्रेड डील में संसद को भरोसे पर लेना चाहिए। वहीं ट्रंप के बयान में कृषि का उल्लेख होने पर भी कई दलों ने आपत्ति जताई। भारी हंगामे बाद सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। इसके बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने चीन का मुद्दा उठा दिया। बीजेपी सांसदों के भारी विरोध के बाद सदन को दोबारा 3 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

 

इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेताओं गौरव गोगोई और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की। यह बैठक सदन को उचित तरीके से चलाने पर सहमति बनाने के उद्देश्य से की गई। अब खबर आ रही है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल संसद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान दे सकते हैं। वह मुंबई से दिल्ली लौट रहे हैं। 

 

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विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार का दावा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता मेक इन इंडिया वस्तुओं को बढ़ावा मिलेगा। बीजेपी सांसद डील को बड़ा कूटनीतिक कदम और भारत की जीत बताने में जुटे हैं। हालांकि विपक्षी दल रूसी तेल नहीं खरीदने और कृषि क्षेत्र के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटे हैं।

दो बार स्थगित किया गया सदन

मंगलवार को जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, वैसे ही विपक्षी दलों ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का मुद्दा उठा दिया। कांग्रेस सदस्य नारेबाजी करते आसन के करीब तक पहुंच गए। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से सदन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग देने का अनुरोध किया। हालांकि विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी नहीं बंद की। इसके बाद सदन को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है।

 

भारत- अमेरिका व्यापार समझौते पर डोनाल्ड ट्रंप ने कृषि क्षेत्र का जिक्र किया। विपक्ष ने ट्रंप के इसी दावे को मुद्दा बना लिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने किसानों के हितों के साथ समझौता किया है। अमेरिका के साथ डील किसानों पर बुरा असर डालेगी। रमेश ने कहा कि ईयू और यूएस दोनों ट्रेड डील का टेक्स्ट दोनों सदनों के पटल पर रखा जाना चाहिए और उस पर बहस होनी चाहिए, क्योंकि अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि भारत ने अमेरिका से कृषि आयात को उदार बनाया है।

 

कांग्रेस के अलावा अन्य दल भी अमेरिका के साथ ट्रेड डील के मुद्दे पर राज्यसभा से वॉकआउट किया। इसके बाद जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह और रणदीप सुरजेवाला, आप के संजय सिंह, आरजेडी के मनोज झा समेत कई विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। उधर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी कहा, 'हमें बहुत मजबूती से लगता है कि स्पष्टता की जरूरत है, क्योंकि अब तक सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट और प्रेस बयान ही हैं, कोई डिटेल नहीं है। सरकार को संसद को भरोसे में लेना चाहिए और साफ बताना चाहिए कि किस बात पर सहमति बनी है।'

'हमारे कृषि क्षेत्र को बर्बाद कर देगा'

आप सांसद मलविंदर सिंह कंग ने कहा, 'हम 18% टैरिफ का स्वागत करते हैं, लेकिन जिस तरह से अमेरिकी इंपोर्ट यहां जीरो ड्यूटी पर किया जाएगा, वह हमारे कृषि क्षेत्र को बर्बाद कर देगा। यह बहुत खतरनाक है। हमारे कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए भारत सरकार को इस पर फिर से सोचना चाहिए।'

'ट्रेड डील की सच्चाई कोई नहीं जानता'

उधर, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा, 'इस तथाकथित भारत-अमेरिका डील के पीछे असली सच्चाई क्या है, यह कोई नहीं जानता। इस डील की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने की है। लेकिन भारत सो रहा था। पीएम को उन्हें जवाब देने के लिए जागना पड़ा। यह इस देश की दुखद स्थिति है। जब संसद का सत्र चल रहा होता है तो वे संसद के प्लेटफॉर्म के बजाय एलन मस्क के 'एक्स' प्लेटफॉर्म पर अधिक भरोसा करते हैं।'

 

उन्होंने आगे कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय लोगों के लिए कई चिंताएं हैं। ऐसा लगता है कि हम अमेरिकी किसानों के लिए कृषि क्षेत्र खोल रहे हैं। हमारे देश में कृषि उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी।'

 

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राहुल के बयान पर आज भी हंगामा

अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों की बैठक बुलाई। इसमें समझौते की जानकारी सभी सांसदों को दी गई। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी अपने सांसदों की बैठक बुलाई थी। सोमवार को राहुल गांधी पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के हवाले चीन का मुद्दा उठाया। मंगलवार को भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने चीन का मामला दोबारा उठाया। इस पर हंगामा हो गया। उधर, अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बीजेपी सांसद जेपी नड्डा का कहना है कि सदन को विस्तृत जानकारी दी जाएगी।