असम विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। अभी तक के रूझानों के मुताबिक यह चुनाव मुख्य तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच होने जा रहा है। राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में लड़ाई मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच हो गई है। दोनों नेता एक दूसरे के उपर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर एक दूसरे को घेर रहे हैं। इसके अलावा असोम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, रायजोर दल और AIUDF जैसे क्षेत्रिय दल भी मौजूद हैं, जो इस चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। यह छोटे दल दोनों राष्ट्रीय पार्टियों (बीजेपी-कांग्रेस) के गठबंधन में या तो सामने से या फिर पिछले रास्ते से शामिल हैं।
इस बीच पूर्वोत्तर के दो और क्षेत्रिय दल हैं, जो इस बार के चुनावी समर में कूदने जा रहे हैं। दरअसल, मेघालय के मुख्यमंत्री और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के अध्यक्ष कॉनराड संगमा और टिपरा मोथा पार्टी के अध्यक्ष प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने हाथ मिलाकर असम में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दोनों नेता राज्य में कई रैलियां कर चुके हैं और अपने गठबंधन के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। एनपीपी और टिपरा मोथा असम का चुनाव नॉर्थईस्ट के बैनर तले लड़ने जा रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर यह नॉर्थईस्ट बैनर और टिपरा मोथा-NPP का नया समीकरण क्या है...
दीमा हसाओ जिले को बनाया केंद्र
दरअसल, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और टिपरा मोथा पार्टी के नेता प्रद्योत देबबर्मा के साथ असम के दीमा हसाओ जिले में स्टेज शेयर किया। इस रैली में हजारों की तादात में लोग मौजूद रहे। रैली में ही डेनियल लैंगथासा के नेतृत्व में एक हजार से ज्यादा लोग NPP में शामिल हुए। संगमा ने सभी नेताओं का स्वागत किया।
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इसी दौरान नेशनल पीपुल्स पार्टी ने अनौपचारिक रूप से डेनियल लैंगथासा को हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की लिस्ट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। कॉनराड संगमा ने रैली में सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि लैंगथासा हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र से NPP के उम्मीदवार होंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सही समय पर औपचारिक घोषणा की जाएगी।

पार्टी ने असम के दीमा हसाओ जिले में हाई-प्रोफाइल ताकत दिखाने के साथ औपचारिक रूप से अपना कैंपेन भी शुरू किया है। इस रैली में जो सबसे खास बात है, वह यह कि कैंपेन की शुरुआत 'वन नॉर्थईस्ट' के बैनर तले हुई। इस रैली में संगमा ने नॉर्थईस्ट यूनिटी की वकालत की और हाफलोंग सीट पर अपना दावा ठोंका।
नॉर्थईस्ट बैनर क्या है?
बता दें कि कॉनराड संगमा ने नवंबर 2025 को 'नॉर्थईस्ट बैनर' यानि 'One North East' नाम से नए राजनीतिक पहल या संयुक्त मंच लॉन्च किया था। इस बैनर तले पूर्वोत्तर के सातों राज्यों के मुद्दे उठाकर उसमें विस्तार करना है। इस बैनर में कॉनराड संगमा के अलावा प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा, नागालैंड के पूर्व बीजेपी प्रवक्ता म्होंलुमो किकॉन और डैनियल लंगथासा आदि नेता शामिल हैं।
क्या बीजेपी देगी संगमा का साथ?
बता दें कि कॉनराड संगमा और उनकी पार्टी NPP मेघालय में एक साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। दोनों एनडीए का हिस्सा हैं। ऐसे में NPP के एनडीए के साथ होने के कारण क्या बीजेपी भी हाफलोंग विधानसभा से उम्मीदवार उतारेगी? यह इस वक्त सबसे बड़ा सवाल है। हालांकि, इस सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि NPP अपनी खुद की राजनीतिक पहचान और विचारधारा को मानती है। उन्होंने कहा कि पार्टी पारंपरिक रूप से अकेले चुनाव लड़ती है और उन्होंने साफ किया कि वह हाफलोंग में अपना उम्मीदवार उतारेंगे।
रैली में समुदायों के बीच एकजुटता की अपील
साथ ही, कॉनराड संगमा ने कहा कि NPP किसी भी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने असम विधानसभा चुनाव बाद के विकल्प खुले रखते हुए कहा, 'हम चुनाव के नतीजों के बाद अपने लोगों के सबसे अच्छे हित में फैसले लेंगे।' रैली में लोगों को संबोधित करते हुए कॉनराड संगमा और प्रद्योत देबबर्मा ने पूर्वोत्तर के अलग-अलग समुदायों के बीच एकजुटता की अपील की। दोनों ने लोगों से उनकी जमीन के अधिकार, पहचान और भविष्य की रक्षा के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के बीच एकता उन्हें बांटने की किसी भी बाहरी कोशिश को रोकेगी।
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असम सरकार पर हमला
रैली से पहले असम के स्थानीय प्रशासन ने मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के हेलीकॉप्टर को उतरने की इजाजत नहीं दी थी। इसपर उन्होंने कहा, 'अगर हमें हेलीकॉप्टर उतारने की इजाजत नहीं मिली तो हम सड़क से आएंगे, अगर जरूरत पड़ी तो हम पैदल आएंगे। वहीं, डेनियल लैंगथासा ने रैली को संबोधित करते हुए असम के स्थानीय मुद्दो पर बोला। उन्होंने जनता के मुद्दों को भी स्टेज से संबोधित किया। लैंगथासा ने शहीदों की विरासत को याद करते हुए लोगों के जमीन के अधिकारों को लेकर अवाज उठाई, जिसपर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।
NPP में औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद डैनियल लंगथासा ने कहा कि यह रैली बीर शंबुधन फोंगलो की पुण्यतिथि के मौके पर हुई है। बीर शंबुधन फोंगलो जिस दिन शहीद हुए थे, उस दिन को इस इलाके में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि बीर शंबुधन फोंगलो ने आजादी से पहले अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोगों की जमीन, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध किया था।
फिर जल-जंगल और जमीन की उठी बात
लंगथासा ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर असम की हिमंता सरकार स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा किए बिना आदिवासियों की जमीन बेच रही है। उन्होंने कहा कि NPP इलाके में विकास, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट या इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के खिलाफ नहीं है। हालांकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पार्टी स्थानीय गांव वालों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के बिना जमीन की बिक्री या ट्रांसफर और छठे शेड्यूल की सुरक्षा को कमजोर करने का विरोध करती है।
लंगथासा ने कहा, 'हमारी लड़ाई अपनी जमीन और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए है। असम की चुनावी लड़ाई पहचान और संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए होगी।' कुल मिलाकर दिमा हसाओ जिले में एनपीपी और टिपरा मोथा ने स्थानीय मुद्दों को उठाकर यहां के लोगों को एक मंच पर लाने की कोशिश की है।
