असम विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग इस महीने के आखिर तक चुनावी तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस बड़े ऐलान से पहले राज्य के बड़े से लेकर छोटे दल जनता के बीच अपना-अपना एजेंडा सेट करने में जुटे हुए हैं। इस काम में सबसे आगे दोनों राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस और बीजेपी हैं। दोनों पार्टियां एक भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहतीं, जिससे एक दूसरे को जनता की नजर में नीचा दिखाया जा सके। यही वजह है कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को पाकिस्तानी समर्थक बता रहे हैं। इतना ही नहीं सीएम ने कहा है कि असम की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और मुख्य विपक्षी कांग्रेस राज्य में जीतने को लेकर गंभीर नहीं है।

 

दूसरी तरफ कांग्रेस भी बीजेपी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर जनता के बीच जा रही है और बताने की कोशिश कर रही है कि यह सरकार भ्रष्टाचारी है। राज्य में जनता के कांग्रेस ने कहा है कि बीजेपी के भ्रष्टाचार और सिंडिकेट शासन के खिलाफ वह लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में दोनों ही पार्टियां असम में एक दूसरे के खिलाफ नेरेटिव का सियासी खेल   खेल रही हैं। आइए जानते हैं कि कांग्रेस-बीजेपी नैरेटिव बनाने का काम किस तरह से कर रही हैं...

 

इस चुनाव में सीएम हिमंता सरमा का चुनाव प्रचार और हमला कांग्रेस के खिलाफ है। उन्हें पता है कि राज्य के चुनाव में अगर कोई बीजेपी को चुनौती दे सकता है तो वह कांग्रेस पार्टी है। इसलिए सरमा राज्य की सत्ता का सफर कांग्रेस को हराकर ही पा सकते हैं। 

 

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प्रियंका गांधी के महत्व को नकारा!

कांग्रेस की महासचिव और राष्ट्रीय स्तर की दूसरे नंबर की महत्वपूर्ण नेता प्रियंका गांधी वाड्रा का गुवाहाटी में प्रस्तावित दौरा है। जब इस बारे में मंगवार (17 फरवरी) को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से पूछा गया तो उन्होंने प्रियंका गांधी के महत्व को ही घटा दिया। सीएम हिमंता ने इस दौरे के महत्व को कम करके आंका और सवाल किया कि क्या इसका राज्य में कोई चुनावी असर होगा?

 

 

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सरमा ने कहा, 'क्यों? क्या वह यहां वोट करने जा रही हैं? असम के राजनीतिक माहौल में यहां की स्थानीय लीडरशिप का ज्यादा महत्व है।' मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं बड़ा नेता हूं। भूपेन बोरा बड़े नेता हैं। जहां तक ​​असम का सवाल है, दिलीप सैकिया बड़े नेता हैं। राज्य स्तर के नेताओं का वोटरों पर आने वाले राष्ट्रीय हस्तियों की तुलना में ज्यादा असर होता है।'

कांग्रेस नहीं रायजोर दल लड़ाई में होगी- सीएम

उन्होंने दावा किया, 'अगले साल तक कांग्रेस के सभी मेहनती मुस्लिम नेता रायजोर दल में शामिल हो जाएंगे। अगले चुनाव के लिए हमारी मुख्य राजनीतिक चिंता कांग्रेस नहीं, बल्कि रायजोर दल है क्योंकि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता कांग्रेस से क्षेत्रीय संगठन में जा सकते हैं।'

 

उन्होंने कहा कि अगर अखिल गोगोई कांग्रेस के साथ जुड़ते हैं तो यह अलग बात है। लेकिन अगर वह अपनी पार्टी को एक स्वतंत्र ताकत के रूप में बनाए रखते हैं तो बीजेपी को रायजोर दल के खिलाफ लड़ना होगा।


बीजेपी और कांग्रेस दोनों आने वाले चुनावी मुकाबलों से पहले अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिशों को तेज कर रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री हिमंता ने एक और बड़ा बयान देकर जनता के बीच कांग्रेस के महत्व को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस उनकी पार्टी बीजेपी के सामने लड़ाई में ही नहीं है। 

उन्होंने दावा किया, 'अगले साल तक कांग्रेस के सभी मेहनती मुस्लिम नेता रायजोर दल में शामिल हो जाएंगे। अगले चुनाव के लिए हमारी मुख्य राजनीतिक चिंता कांग्रेस नहीं, बल्कि रायजोर दल है क्योंकि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता कांग्रेस से क्षेत्रीय संगठन में जा सकते हैं।'

 

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उन्होंने कहा कि अगर अखिल गोगोई कांग्रेस के साथ जुड़ते हैं तो यह अलग बात है। लेकिन अगर वह अपनी पार्टी को एक स्वतंत्र ताकत के रूप में बनाए रखते हैं तो बीजेपी को रायजोर दल के खिलाफ लड़ना होगा।

कांग्रेस लीडरशिप पर सवालिया निशान!

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस को अपरिवक्व पार्टी बताया। उन्होंने असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को सीनियर नेताओं के पार्टी छोड़ने के पीछे के कारणों पर ध्यान देना चाहिए था, न कि उन्हें मनाकर उनके फैसलों को पलटने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी बोलेंगे तो लोग फैसला बदल देंगे। सरमा ने कहा कि जब कोई नेता तीन दशक से ज्यादा समय तक पार्टी की सेवा करने के बाद इस्तीफा देता है, तो उसके पीछे कोई बहुत गंभीर कारण होते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आत्मनिरीक्षण करने के बजाय, कांग्रेस लीडरशिप यह मान लेती है कि व्यक्तिगत दखल से फैसले बदल सकते हैं।

 

कांग्रेस का बीजेपी और सीएम के खिलाफ नैरेटिव

असम चुनाव 2026 में कांग्रेस भी बीजेपी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ जनता के बीच नैरेटिव सेट कर रही है। कांग्रेस मुख्य रूप से बीजेपी को घेरते हुए हिमंता सरकार की विफलताओं, भ्रष्टाचार और विभाजनकारी नीतियों पर हमला बोल रही है। इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस जनता के बीच भी जा रही है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इसमें सीएम हिमंता के परिवार से जुड़े कथित गंभीर घोटाले भी शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि बीजेपी चुनाव से पहले फ्रीबीज (जैसे चावल, दाल, नमक और गैस पर सब्सिडी) देकर वोट खरीदने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने इसे गरीबों की चिंता नहीं बल्कि बीजेपी की चुनावी चाल बताया है।  

असम में टिकट बेचने के आरोप

इसके अलावा कांग्रेस ने बीजेपी पर असम में टिकट बेचने के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने कहा है कि बीजेपी सत्ता का दुरुपयोग कर लोगों को लूट रही है और असम की वित्तीय स्थिति बिगाड़ रही है। इसके अलावा कांग्रेस की प्रदेश इकाई बीजेपी की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार में असम में बाढ़ प्रबंधन और बुनियादी विकास की विफलता का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि राज्य में युवाओं के सामने बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दे हैं, जिनसे वह रोगाना लड़ रहे हैं।

जनजातीय समुदायों को धोखा

कांग्रेस ने बीजेपी पर चुनाव से पहले जनजातीय समुदायों को धोखा देने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी सरकार ने ट्राइबल स्टेटस देने के नाम पर लोगों में भ्रम फैलाया है। कांग्रेस ने कहा है कि बीजेपी ने जनजातीय समुदायों से वादे सिर्फ वोट बैंक के लिए हैं, जबकि उसका वास्तविक विकास नहीं कर रही है।

 

साथ ही पार्टी जनता को यह बताने की कोशिश कर रही है कि बीजेपी सरकार असम में कथित चुनावी धांधली और वोट चोरी कर रही है और राज्य में चुनाव जीतने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दे रही है।