राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सरकार में आने की असफल कोशिशों के बाद अब लालू यादव परिवार के बड़े और घर से निकाले गए बेटे तेज प्रताप यादव के सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कहने के लिए उन्होंने 'जन शक्ति जनता दल' नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी तो बना ली है लेकिन उनकी राजनीतिक गंभीरता पर लोग अक्सर सवाल उठाते रहे।
बिहार चुनाव में न अपनी सीट बचा पाए, न ही अपने उम्मीदवारों की। तेज प्रताप हारकर भी चर्चा में हमेशा बने रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 'दिमागी नक्सल' वाला बयान दिया तो तेज प्रताप भड़क गए और कहने लगे कि बीजेपी में भी दिमागी पागल और नक्लस लोग हैं। उनके बयान चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार वह अलग वजहों से चर्चा में है।
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कभी तेज प्रताप पूजा-पाठ और प्रवचन के वीडियो सोशल मीडिया पर डालते हैं, कभी कृष्ण बन जाते हैं तेज प्रताप यादव की सियासी हालत खराब हो गई है लेकिन रील वाली हालत सुधर गई है। आरजेडी से निकाले जाने और बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनका राजनीतिक कद काफी घट गया है।
अपनी पार्टी कैसे बनाई?
तेज प्रताप की धर्म में रुचि रही है। वह अक्सर वृंदावन जाते हैं, खुद को महादेव और कृष्ण का भक्त बताते हैं। मई 2025 में राष्ट्रीय जनता दल और परिवार से बेदखल करने का आदेश लालू प्रसाद यादव ने दिया था। परिवार से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) बनाई। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कई उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। खुद तेज प्रताप महुआ सीट से तीसरे नंबर पर रहे। वहां लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) और RJD के उम्मीदवार आगे रहे। सियासत फ्लॉप रही लेकिन सिर पर पीली टोपी और घर के बैकग्राउंड में जनशक्ति जनता दल चमकाते रहते हैं।
संत कैसे बने?
तेज प्रताप यादव ने संत तेज प्रताप के नाम से भी एक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया है। कभी शिवपुराण तो कभी भगवत गीता के श्लोक सुनाते हैं, अर्थ बताते हैं, पूजा का सही तरीका बताते हैं। वह धार्मिक कपड़े पहनते हैं, बांसुरी बजाते हैं, रुद्राभिषेक करते तस्वीरें शेयर करते हैं।
भोजपुरी बवाल में कैसे फंस गए?
तेज प्रताप इन दिनों 'भोजपुरी बावाल' नाम से हॉटस्टार पर एक रियलिटी शो में भी दिख रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर मल्लिका शेरावत के साथ कुछ नया करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देश और एशिया कुछ खास देखने वाला है। भोजपुरी बवाल में भी उनका अलग अंदाज दिखा। उन्होंने भोजपुरी के सितारों को शो में खास दावत दी, कार्ड पर जन शक्ति जनता दल का सिंबल छिपा था। वह धर्म, राजनीति और एंटरटेनमेंट खुद साधना चाहते हैं। उनका 'TY ब्लॉग' यूट्यूब पर लोकप्रिय है।
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तेज प्रताप यादव की सियासत क्या है?
तेज प्रताप यादव, राजनीति में कुछ हासिल नहीं कर पा रहे हैं लेकिन निराश भी नहीं हैं। वह बिहार बदलने की बात करते हैं, अपनी पार्टी का प्रचार भी करते हैं। इन दिनों, उनके रुख से ऐसा लग रहा है कि वह प्रशांत किशोर का साथ भी दे रहे हैं। तेज प्रताप यादव ने बिहार में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को आंदोलन का न्योता दिया है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक को बिहार आने का न्योता भी दिया। NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों के प्रदर्शन में वह जेल भी गए। राजनीतिक रसूख सिमट गया है लेकिन अपने भाई तेजस्वी से ज्यादा चर्चा में हमेशा बने रहते हैं।
सियासी संकट से कैसे उबर सकते हैं तेज प्रताप?
तेज प्रताप अपने परिवार से अलग रहते हैं। वह परिवार के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। अपने जन्मदिन पर उन्होंने पिता को बुलाया भी था लेकिन परिवार के दूसरे सदस्य नहीं दिखे। तेजस्वी यादव से उनकी अनबन बनी हुई है। लोग राजनेता के तौर पर उन्हें कम गंभीरता से लेते हैं। उनके भाई भी उन्हें एंटरटेनर बता चुके हैं।
तेजस्वी यादव जेल से छूटने के बाद उनसे मिले थे। लालू प्रसाद यादव भी उनके जन्मदिन पर पहुंचे थे। आरजेडी में रहकर भी वह 'जयचंदों' के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। वह उन लोगों जयचंद बुलाते हैं जो उनके भाई तेजस्वी के करीबी हैं। उनका कहना है कि उनके भाई को भाई के ही साथी गुमराह कर रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में एक नेता के हवाले से बताया गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव हारने के बाद तेज प्रताप, बिहार की राजनीति में अब अप्रासंगिक हो गए हैं। उनका भविष्य तभी सुधरेगा, जब राष्ट्रीय जनता दल दोबारा मजबूत हो जाए, तेजस्वी यादव से वह सुलह कर लें और परिवार में वापसी हो पाए।
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कहां फंस जाता है पेच?
तेज प्रताप यादव की राजनीतिक गंभीरता पर सवाल उठते रहे हैं। अपनी जीवनशैली से लेकर बोलने के अंदाज तक में वह एक बड़े तबको को गंभीर नहीं लगे। वह बिहार सरकार में 2 बार मंत्री रहे। पहली बार नीतीश कुमार की मदद से जब आरजेडी सत्ता में आई थी, तब नवंबर 2015 में वह स्वास्थ्य मंत्री बने।
अगस्त 2022 में एक बार फिर जेडीयू के सहयोग से आरजेडी सत्ता में आई और वह पर्यावरण मंत्री बने। इस दौरान भी वह कभी शिव बनते, कभी कृष्ण बनते, कभी होली पर अपने गार्ड को ठुमके लगाने के आदेश देते।
विवाद भी बिगाड़ रहे तेज प्रताप का खेल
तेज प्रताप यादव का सीनियर नेताओं से हमेशा टकराव रहा है। उनकी निजी जिंदगी भी खराब वजहों से चर्चा में रही। पत्नी से शादी के कुछ महीने बाद तलाक का केस चला, फिर अनुष्का यादव के साथ वाली तस्वीर ने उन्हें और हाशिए पर पहुंचा दिया। साल 2025 में आरजेडी से छह साल के लिए निष्कासन और परिवार से उन्हें दूर कर दिया।
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राजनीति को लेकर गंभीर नहीं तेज प्रताप?
तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी बना ली, चुनाव में महुआ सीट से हार गए। जमीन पर उनके कार्यकर्ता ही नहीं थे। आलम यह था कि जिस उम्मीदवार का वह चुनाव प्रचार करने हेलीकॉप्टर से जाते, उसका नाम तक नहीं जानते थे। भाषण शैली भी ऐसी नहीं कि जिससे लोग कनेक्ट कर पाए।
तेज प्रताप यादव का अपने हर करीबी से झगड़ा भी हो चुका है। पहले उनके चर्चित प्रशंसक अविनाश यादव से विवाद, फिर अपने निजी सहायक और दोस्त मोती पर चोरी का आरोप लगाया। कभी अनुष्का यादव के घर पहुंच गए, कई विवाद ऐसे हैं, जिनकी वजह से नेता के तौर पर उनकी छवि कमजोर हुई है।
