सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का खास महत्व है। इस त्योहार को पूरे देश में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री को गाय के दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए, ताकि भक्तों को देवी मां का आशीर्वाद मिले। इसके साथ ही आज के दिन लोगों को देवी शैलपुत्री के मंदिर जाना चाहिए।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, देवी शैलपुत्री जी मां पार्वती का एक स्वरूप हैं। उनकी उपासना और आराधना करने से भक्तों को अपने जीवन की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। इसके साथ ही मां शैलपुत्री के आशीर्वाद से लोगों के जीवन की सभी कठिनाइयां दूर होती हैं। इस साल 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा की जा रही है। अब सवाल उठता है कि शैलपुत्री के कौन-कौन से मंदिर हैं, जहां देवी मां के दर्शन करने के लिए लोगों को जाना चाहिए।
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देवी शैलपुत्री के मंदिर
हिमाचल प्रदेश
शैलपुत्री मां के नाम का अर्थ पर्वत की पुत्री है। उन्हें मां भवानी, पार्वती और हिमवती के नाम से भी जाना जाता है। वे राजा हिमावत की पुत्री थीं। देश में मां शैलपुत्री के कई मंदिर हैं, जिनमें से एक हिमाचल प्रदेश में है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सियांज गांव में देवी शैलपुत्री जी का एक खास मंदिर है, जहां देवी मां की प्रतिमा एक रथ पर बैठी नजर आती है। माना जाता है कि इस मंदिर में जाने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है।
जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में देवीमाई मंदिर है, जहां हर साल नवरात्र के दौरान लाखों भक्त आते हैं। खास तौर पर नवरात्र के पहले दिन भारी संख्या में भक्त आते हैं और मां शैलपुत्री के दर्शन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह मंदिर हजार साल पुराना है। देवीमाई मंदिर बारामूला शहर से 1 किलोमीटर दूर खानपुर में स्थित है। इस मंदिर में सिर्फ मां शैलपुत्री की ही प्रतिमा विराजमान नहीं है, बल्कि यहां एक प्राचीन शिवलिंग भी स्थित है।
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उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मां शैलपुत्री का प्रसिद्ध मंदिर है, जो वाराणसी रेलवे स्टेशन से लगभग 10 मिनट की दूरी पर अलीईपुर में स्थित है। मंदिर वरुणा नदी के पास स्थित है। नवरात्र के दौरान देश-दुनिया से लाखों भक्त इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री भक्तों को दर्शन देती हैं।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
