कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में मैंगलोर के पास स्थित प्रसिद्ध कुक्के श्री सुब्रमण्य स्वामी मंदिर अपने अद्भुत धार्मिक महत्व और सर्प पूजा के लिए देशभर में जाना जाता है। यह मंदिर भगवान सुब्रमण्य स्वामी और नाग देवता को समर्पित है और लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। भक्त मानते हैं कि यहां पूजा करने से सर्पदंश, नाग दोष और अन्य ग्रह दोष दूर होते हैं, साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

 

मंदिर की स्थापना और पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान सुब्रमण्य ने सर्पों और राक्षसों का नाश कर धर्म की स्थापना की थी और सर्पों को अपना सेवक बनाया। इसी वजह से यह मंदिर सर्पदंश मुक्ति और नाग पूजा का प्रमुख स्थल बन गया। लोक मान्यता है कि विवाहिता महिलाएं, बच्चे और संतान सुख के इच्छुक परिवार विशेष रूप से यहां पूजा करने आते हैं।

 

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मंदिर की विशेषता

मुख्य देवता:

 

कुक्के मंदिर में मुख्य रूप से भगवान सुब्रमण्य (कार्तिकेय/मुरुगन) की पूजा होती है। उन्हें भगवान शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में जाना जाता है।

 

सांपों का महत्व:

 

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका सर्प पूजा से जुड़ा होना है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पूजा करने से सर्पदंश और नाग दोष का निवारण होता है। इसलिए इसे 'कुक्के सर्प मंदिर' भी कहा जाता है।

 

पवित्रता और आस्था:

 

मंदिर को कुंकुम, विशेष फूल और नाग देवता के प्रतीक के माध्यम से पूजा का केंद्र माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां नाग पंचमी और अन्य अवसरों पर आते हैं।

 

स्थापत्य कला:

 

मंदिर में दक्षिण भारतीय शैली की वास्तुकला है, जिसमें शानदार गुम्बद, कलाकृतियां, मूर्तियां और शिलालेख देखने को मिलते हैं। यह न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

 

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मंदिर से जुड़ी मान्यता

सर्पदंश मुक्ति:

 

कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति पर नाग दोष या सर्पदंश का प्रभाव हो, तो यहां पूजा और प्रसाद लेने से दोष दूर होता है।

 

विवाह और संतान सुख:


माता-पिता और विवाहित लोग यहां अपने बच्चों की सुरक्षा और संतान सुख की कामना के लिए आते हैं।

 

शुभ कार्य और जीवन रक्षा:


श्रद्धालु यह मानते हैं कि यहां पूजा करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

मंदिर में किसकी पूजा होती है

  • मुख्य रूप से भगवान सुब्रमण्य स्वामी (कार्तिकेय/मुरुगन) की पूजा होती है।
  • मंदिर परिसर में नाग देवता (सर्प देवता), भगवान गणेश, और भगवान शिव की भी प्रतिमाएं हैं।
  • पूजा विधि में अन्नदान, फल, फूल और दीपक का विशेष महत्व है।
  • श्रद्धालु अक्सर कुक्के के प्रतीक के रूप में नाग मूर्तियों के सामने विशेष पूजा करते हैं।

मंदिर तक पहुंचने का रास्ता

निकटतम हवाई अड्डा: मैंगलोर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 90 किलोमीटर)

मैंगलोर से टैक्सी या बस के माध्यम से कुक्के मंदिर पहुंचा जा सकता है।

 

निकटतम रेलवे स्टेशन: सुल्लिया रेलवे स्टेशन

मैंगलोर से ट्रेन या बस द्वारा सुल्लिया पहुंचा जा सकता है।

 

सड़क मार्ग 

  • कुक्के मंदिर सुल्लिया से लगभग 20 किलोमीटर और मैंगलोर से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।
  • निजी कार, टैक्सी और राज्य परिवहन की बसें यहां नियमित रूप से आती हैं।
  • सड़क मार्ग खूबसूरत पहाड़ी और हरियाली से भरा हुआ है, जो यात्रा को यादगार बनाता है।