भारत के दक्षिणी राज्य में कई मंदिर प्रसिद्ध हैं, जिनमें से एक जलकंठेश्वर मंदिर है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दर्शन करने गए हैं। इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह मंदिर केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक नहीं माना जाता है, बल्कि इस मंदिर की वास्तुकला भी देखने लायक है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर ने विदेशी आक्रमण भी झेले, जिससे मंदिर की वास्तुकला को नुकसान हुआ। इसके बावजूद आज भी इस मंदिर की वास्तुकला देखने के लिए देश-दुनिया से कई लोग आते हैं।
जलकंठेश्वर मंदिर तमिलनाडु के वेल्लोर शहर में स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था, जिसके आसपास जल की धारा बह रही थी। इसी वजह से इस मंदिर का नाम जलकंठेश्वर पड़ा था, जिसके बाद भक्तों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया था। तब से लेकर आज तक इस मंदिर में लाखों भक्त आते हैं।
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16वीं सदी में हुई मंदिर की स्थापना
इस मंदिर का निर्माण 16वीं सदी में विजयनगर के शासकों की देखरेख में हुआ था। मंदिर की दीवारों पर द्रविड़ वास्तुकला देखी जा सकती है। वास्तुकला के नजरिए से इस मंदिर का कल्याण मंडप बेहद सुंदर है, जहां के स्तंभों पर बेहद सुंदर कलाकृतियां हैं। मंदिर के खंभों पर देवी-देवताओं और हाथियों की आकृतियां बेहद सुंदर तरीके से बनाई गई हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर को विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा था। इस वजह से मंदिर को काफी नुकसान हुआ था, जिसके चलते लंबे समय तक मंदिर बंद रहा था। इसके बाद विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिर पर कब्जा कर लिया था।
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शिवरात्रि में लाखों भक्त करते हैं दर्शन
जलकंठेश्वर मंदिर में हर दिन हजारों लोग भगवान शिव के दर्शन करने जाते हैं। खासतौर पर महाशिवरात्रि और प्रदोष के दौरान लाखों लोग देश-दुनिया से मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में सिर्फ भगवान के दर्शन करने से लोगों के जीवन के सभी दुख, दर्द और कष्ट मिट जाते हैं। इसी वजह से कई साल पुराना यह मंदिर लोगों के लिए भक्ति और आस्था का केंद्र बन गया है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
