कई बार लोगों के जीवन में अचानक बदलाव आ जाता है, जिसमें एक अमीर व्यक्ति अचानक आर्थिक तंगी का सामना करने लगता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों के गोचर यानी प्रवेश से जीवन में बदलाव आता है। रावण संहिता के मुताबिक कुंडली में ग्रहों का गोचर होना अहम माना गया है। इसमें मुख्य तौर पर एक ग्रह दूसरी राशि में प्रवेश करता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। यह प्रभाव हर व्यक्ति के लिए एक समान नहीं होता, बल्कि जन्म कुंडली के आधार पर ग्रहों के गोचर का अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। रावण संहिता के अनुसार ग्रहों का गोचर व्यक्ति के कर्मों के फल को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति को जीवन में नए अवसर या चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रहों के गोचर का अर्थ है किसी ग्रह का 12 राशियों में से एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना, यानी हर ग्रह कुछ समय बाद एक राशि से दूसरी राशि की ओर चला जाता है। इसी प्रक्रिया को ग्रह का गोचर कहा जाता है। ग्रहों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर ग्रह अलग अवधि के लिए किसी एक राशि में रहता है। जैसे चंद्रमा किसी राशि में सिर्फ डेढ़ दिन तक रहता है। जानकारी के लिए बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 9 ग्रह होते हैं। अब सवाल उठता है कि किस ग्रह के गोचर से व्यक्ति के जीवन में कैसा प्रभाव पड़ता है?
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ग्रहों के गोचर का समय
सूर्य किसी राशि में प्रवेश करने के बाद 1 महीने तक उसी राशि में रहते हैं। वहीं, अगर हम चंद्रमा के गोचर की बात करें तो वह सिर्फ डेढ़ दिन तक किसी एक राशि में रहते हैं, उसके बाद दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। बृहस्पति ग्रह 1 साल में अपनी राशि बदलते हैं। शुक्र ग्रह लगभग 23 दिनों बाद दूसरी राशि में प्रवेश करता है। मंगल ग्रह करीब डेढ़ महीने बाद गोचर करता है। बुध ग्रह लगभग 14 दिनों बाद दूसरी राशि में प्रवेश करता है। शनि ग्रह ढाई साल तक एक राशि में रहते हैं, जबकि राहु और केतु लगभग डेढ़ साल बाद गोचर करते हैं। अब सवाल उठता है कि ग्रहों का गोचर व्यक्ति के जीवन पर क्या असर डालता है।
ग्रह के गोचर का प्रभाव
सूर्य - यह व्यक्ति के आत्मविश्वास, लीडरशिप क्वालिटी, निर्णय लेने की क्षमता और ऊर्जा को प्रभावित करता है। साथ ही यह हमारी सेहत और समाज में मान-सम्मान को भी प्रभावित करता है। अगर सूर्य किसी ऐसी राशि में प्रवेश करता है, जिसके स्वामी स्वयं सूर्य हों, तो व्यक्ति को इन गुणों का लाभ मिलता है। सूर्य ग्रह सिंह राशि के स्वामी हैं। सिंह लग्न वाले जातकों के लिए तीसरे भाव में सूर्य का प्रवेश शुभ माना जाता है।
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चंद्रमा - यह व्यक्ति की भावनाओं और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है, जिससे जीवन की सुख-शांति और घर के माहौल पर असर पड़ता है। चंद्रमा ग्रह कर्क राशि के स्वामी हैं। अगर चंद्रमा कर्क राशि वाले व्यक्ति की कुंडली के तीसरे, सातवें या ग्यारहवें भाव में प्रवेश करता है, तो शुभ प्रभाव पड़ता है।
बुध - बुध को बुद्धि, व्यापार, शिक्षा और कौशल का कारक माना जाता है। बुध ग्रह मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। जब बुध इन राशियों में प्रवेश करता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे व्यक्ति की बुद्धि और निर्णय क्षमता तेज होती है।
बृहस्पति - यह धर्म, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। बृहस्पति का धनु और मीन राशि में प्रवेश शुभ माना जाता है, क्योंकि इन दोनों राशियों के स्वामी बृहस्पति ही हैं।
शुक्र - शुक्र को भौतिक सुखों, सुंदरता और प्रेम का कारक ग्रह माना जाता है। यह व्यक्ति के रिश्तों और धन-संपत्ति पर प्रभाव डालता है। शुक्र ग्रह तुला और वृषभ राशि के स्वामी हैं। इसलिए शुक्र का तुला और वृषभ राशि में प्रवेश करना शुभ माना जाता है।
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शनि - शनि को न्याय और अनुशासन का गुरु माना जाता है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों का फल देता है। शनि ग्रह मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। इन दोनों राशियों में शनि का प्रवेश शुभ माना जाता है।
राहु और केतु - इन दोनों को छाया ग्रह माना जाता है, जो जीवन में अचानक बदलाव लाते हैं। राहु और केतु किसी राशि के स्वामी नहीं हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इनका किसी भी राशि के तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में प्रवेश करना शुभ माना जाता है।


