भारत के दिलीप गावित ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में मेंस 100 मीटर T47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल झटल लिया है। T46 खिलाड़ी गावित ने 10.69 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। वहीं भारत के ही मोहम्मद मोर्सिंगनाकथ को सिल्वर मेडल मिला। T47 खिलाड़ी मोर्सिंगनाकथ ने 10.72 सेकंड का समय निकाला। चीन के कांगजुन शि (T46) ने 10 . 80 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

एक ही स्पर्धा में दो वर्गों के खिलाड़ी क्यों?

दो या अधिक वर्गों के खिलाड़ियों को किसी स्पर्धा में एक साथ उतारा जा सकता है, ताकि पर्याप्त प्रतिभागी रहें। T46 और T47 उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके शरीर के ऊपरी हिस्से के एक तरफ कोई कमी होती है, जिसके कारण संतुलन और तालमेल में कम से मध्यम स्तर की असंतुलित चुनौतियां आती हैं। दोनों श्रेणियों में अंतर यही होता है कि विकार कितना गंभीर है और कहां पर है।

 

T46 उन खिलाड़ियों के लिए है जिन्हें कंधे या कोहनी में एक या दोनों तरफ गंभीर शारीरिक अक्षमता होती है, जो लगभग कोहनी के ऊपर से हाथ कट जाने (एम्प्यूटेशन) के बराबर है। वहीं T47 उनके लिए है जिन्हें कलाई या कोहनी के नीचे कम गंभीर शारीरिक अक्षमता होती है जो लगभग कोहनी के नीचे से हाथ कट जाने (एम्प्यूटेशन) के बराबर है।

 

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T64 स्पर्धा में प्रणव देसाई ने जीता ब्रॉन्ज

मेंस 100 मीटर T64 स्पर्धा में प्रणव देसाई ने 11.96 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। जापान के केंगो ओशिमा को गोल्ड (11 . 39 सेकंड ) और थाईलैंड के देनपूम कोतचारांग (11.78 सेकंड ) को सिल्वर मेडल मिला। T64 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके घुटने के नीचे का अंग नहीं है और जो दौड़ने या कूदने के लिए कृत्रिम अंग (प्रोस्थेसिस) का उपयोग करके प्रतिस्पर्धा करते हैं या जिनके पैरों की लंबाई में इसी तरह का अंतर है। 

 

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पेरिस पैरालंपिक 2024 में दो ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली प्रीति पाल ने विमेंस 100 मीटर T35 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 13.98 सेकंड का समय निकालकर इन गेम्स में दूसरा सिल्वर हासिल किया। वह मंगलवार को 200 मीटर T35 वर्ग में भी दूसरे स्थान पर रही थीं। T35 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है, जिनमें समन्वय संबंधी मध्यम स्तर की कमियां होती हैं, जैसे कि हाइपरटोनिया, अटाक्सिया या एथेतोसिस जो अक्सर मस्तिष्क पक्षाघात से जुड़ी होती हैं।